राज्यसभा की रेस में कांग्रेस के ये दिग्गज नेता सबसे आगे, जल्द मिल सकती है दिल्ली से हरी झंडी! देखें चौंकाने वाला नाम

Edited By Himansh sharma, Updated: 03 Jun, 2026 01:15 PM

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मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है।

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में सबसे ज्यादा नजरें कांग्रेस के हिस्से वाली सीट पर टिकी हैं, जहां उम्मीदवार के चयन को लेकर दिल्ली से लेकर भोपाल तक गहन मंथन जारी है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ इस दौड़ में फिलहाल सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह के तीसरी बार राज्यसभा जाने से सार्वजनिक तौर पर इनकार करने के बाद कमलनाथ का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। हालांकि कांग्रेस की परंपरा को देखते हुए अंतिम फैसला सोनिया गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हाथ में ही माना जा रहा है। यही वजह है कि दिग्विजय सिंह का नाम भी अभी पूरी तरह से समीकरणों से बाहर नहीं हुआ है।

इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भले ही खुद को इस रेस से अलग बताते रहे हों, लेकिन पार्टी के भीतर उनके लिए भी लॉबिंग जारी है। संगठन में मजबूत पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व के कुछ प्रमुख नेताओं से करीबी रिश्ते उनके पक्ष को मजबूत बनाते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस अब केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी वजह से ओबीसी, एससी, एसटी और सामान्य वर्ग के प्रभावशाली नेताओं के नामों पर गंभीर चर्चा हो रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा जैसे चेहरे भी चर्चा के केंद्र में हैं। खासकर कमलेश्वर पटेल को विंध्य और कुर्मी वोट बैंक के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व यह भी आंकलन कर रहा है कि राज्यसभा का यह टिकट केवल संसद भेजने का माध्यम नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों की सामाजिक और राजनीतिक बिसात बिछाने का अवसर भी है।

ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, बल्कि यह भी है कि पार्टी अनुभव पर भरोसा जताएगी या फिर सामाजिक समीकरणों के जरिए भविष्य की राजनीति का संदेश देगी। फिलहाल तस्वीर में कमलनाथ सबसे आगे नजर आ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में अंतिम फैसला अक्सर दिल्ली के दरवाजे से ही निकलता है। इसलिए 8 जून तक मध्यप्रदेश की राजनीति में अटकलों का दौर जारी रहने वाला है।

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