कुत्तों के काटने से दहशत में धमधा, रेबीज इंजेक्शन न मिलने से निजी मेडिकल पर लूट!

Edited By Himansh sharma, Updated: 20 Feb, 2026 05:52 PM

rabies shots missing at dhamdha hospital

छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है।

धमधा (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तक कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि काटने के बाद जरूरी रेबीज वैक्सीन के लिए पीड़ितों और उनके परिजनों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक में लगातार डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धमधा में पिछले करीब दो महीनों से रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है।

वैक्सीन के लिए मजबूरी में निजी मेडिकल का सहारा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में वैक्सीन नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है। परिजनों का कहना है कि जो वैक्सीन सामान्यतः करीब 300 रुपये में मिलती है, उसे कुछ निजी मेडिकल दुकानों में 700 से 800 रुपये तक में बेचा जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बनती जा रही है।

लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामले

ग्रामीणों के अनुसार धमधा और आसपास के गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई मामलों में छोटे बच्चों को भी कुत्तों ने काटा है। ऐसे में लोगों में डर और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज और वैक्सीन बहुत जरूरी होती है, क्योंकि रेबीज एक गंभीर बीमारी हो सकती है यदि समय पर इलाज न मिले।

 राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच जमीनी हालात को लेकर विपक्ष ने निशाना साधा है।जिला स्तर पर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के जिला महामंत्री राजीव गुप्ता ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर स्वास्थ्य सुविधाओं में लापरवाही का आरोप लगाया है।

 पीड़ितों का दर्द  “इलाज के लिए भटकना पड़ रहा”

पीड़ित परिवारों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में वैक्सीन नहीं मिलने से उन्हें बाहर महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है। कई परिवारों ने प्रशासन से तत्काल वैक्सीन उपलब्ध कराने और आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए अभियान चलाने की मांग की है।

 बड़ा सवाल

क्या स्वास्थ्य विभाग समय रहते वैक्सीन उपलब्ध करा पाएगा?

क्या आवारा कुत्तों की समस्या पर ठोस कार्रवाई होगी?

या पीड़ित परिवारों को इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा?

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