विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर संयुक्त समिति की बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

Edited By Vandana Khosla, Updated: 20 May, 2026 12:52 PM

mp brijmohan agrawal gave important suggestions in the meeting of the joint

नई दिल्ली/रायपुरः सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर गठित संसद की संयुक्त समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने देश की...

नई दिल्ली/रायपुरः सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर गठित संसद की संयुक्त समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने देश की भावी शिक्षा व्यवस्था के ढांचे को मजबूत करने के लिए अपने कई बहुमूल्य और व्यावहारिक सुझाव साझा किए।

बैठक में देश के उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र के शीर्ष संस्थानों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। इसमें IIT मुंबई, IITDM कांचीपुरम, सास्त्रा विश्वविद्यालय, शिव नादर विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के कुलपतियों एवं विषय-विशेषज्ञों ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपने तकनीकी व व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदुओं को साझा करते हुए सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, "आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को पूरा करने में हमारी शिक्षा नीति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आज का यह संवाद नई शिक्षा नीति (NEP) को और अधिक प्रभावी, रोजगारोन्मुखी, शोध-आधारित तथा हमारे समृद्ध भारतीय मूल्यों के अनुरूप बनाने की दिशा में अत्यंत सार्थक और दूरगामी सिद्ध होगा।"
 
अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा को न केवल वैश्विक मानकों के अनुरूप होना चाहिए, बल्कि उसमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों और नैतिक मूल्यों का समावेश भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा व्यावहारिक कानूनी ढांचा तैयार करना है जो हमारे युवाओं को आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सक्षम हो।

संयुक्त समिति की इस बैठक में आए सभी विशेषज्ञों के सुझावों को विधेयक के अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया गया, ताकि देश को एक समावेशी और भविष्योन्मुखी शिक्षा कानून मिल सके।

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!