Edited By Himansh sharma, Updated: 05 Oct, 2026 02:05 PM

मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल का डीजे और सामाजिक कुरीतियों को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है।
खरगोन (रामेश्वर बड़ोले): मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल का डीजे और सामाजिक कुरीतियों को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। कसरावद में विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे सांसद पटेल ने मंच से संबोधित करते हुए त्योहारों के दौरान बजने वाले डीजे और युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर अपनी बात रखी। सांसद पटेल ने शिव डोला, नवरात्रि और गणेश विसर्जन जैसे धार्मिक आयोजनों में बजने वाले डीजे का जिक्र करते हुए कहा कि डीजे पर नाचने वाले युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जो नशे में होते हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 90 प्रतिशत लोग नशे की हालत में डीजे पर नाचते हैं। सांसद ने डीजे, दारू और दहेज को सामाजिक कुरीतियों से जोड़ते हुए इन पर रोक लगाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।
सांसद का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब नवरात्रि, गणेश विसर्जन और अन्य धार्मिक आयोजनों में डीजे को लेकर लगातार बहस होती रही है। एक ओर धार्मिक आयोजनों में डीजे और संगीत को लेकर युवाओं में उत्साह रहता है, वहीं दूसरी ओर तेज आवाज, नशे और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।
दहेज प्रथा पर भी उठे सवाल
सांसद पटेल ने अपने संबोधन में दहेज प्रथा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने समाज में दहेज जैसी कुरीति के बने रहने पर चिंता जताई और इसके खिलाफ सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता बताई। इसी बीच उनके बयान को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि दहेज प्रथा सामाजिक बुराई है और इसे रोकने के लिए कानून तथा सरकारी स्तर पर लगातार प्रयास किए जाते हैं, तो इसके बावजूद कई क्षेत्रों में यह परंपरा आज भी क्यों बनी हुई है।
खास तौर पर आदिवासी समाज में दहेज प्रथा को लेकर सांसद के बयान के बाद सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग आदिवासी समुदायों और क्षेत्रों में विवाह की परंपराएं और सामाजिक प्रथाएं अलग-अलग हैं, इसलिए इसे पूरे आदिवासी समाज पर लागू करके देखना उचित नहीं होगा।
‘दहेज, डीजे और दारू’ पर सांसद ने रखी बात
सांसद गजेंद्र पटेल ने सामाजिक सुधार से जुड़े मुद्दों पर दहेज, डीजे और शराब को प्रमुख विषयों के रूप में सामने रखा। हालिया एक अन्य कार्यक्रम में भी उन्होंने इन तीनों मुद्दों को लेकर युवाओं को नशे से दूर रहने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की थी।
सांसद के बयान के बाद अब डीजे, नशे और दहेज जैसे मुद्दों पर बहस तेज होने की संभावना है। खासतौर पर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को उत्सव की परंपरा बनाए रखते हुए नशे और अन्य सामाजिक कुरीतियों पर किस तरह प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।