Edited By Desh Raj, Updated: 09 Oct, 2026 10:52 PM

27 फीसदी OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का फैसला आज मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बना रहा.. इस फैसले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सारा दिन आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। OBC आरक्षण को लेकर
(भोपाल): 27 फीसदी OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का फैसला आज मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बना रहा.. इस फैसले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सारा दिन आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। OBC आरक्षण को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश पर अब कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल की प्रतिक्रिया सामने आई है। पटेल ने कहा है कि ऐसे बेहद संवेदनशील विषय पर जबलपुर हाईकोर्ट का जो फैसला आया है,इसमें तत्कालीन कमलनाथ सरकार के आरक्षण संबंधी अध्यादेश को निरस्त किया गया है।
हम सदैव पिछड़े वर्ग के समर्थन में रहे हैं। चाहे ओबीसी आरक्षण का विषय हो या पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की बात, भारतीय जनता पार्टी ने यह कार्य पूरी जिम्मेदारी के साथ किया है। माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी और सभी की सहमति के साथ न्यायालय में पक्ष रखा गया था।
कांग्रेस को किसी वर्ग से प्यार नहीं है-पटेल
मंत्री पटेल ने कहा कि यह बात सच है कि कांग्रेस को किसी वर्ग से प्यार नहीं है, उसे केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ से प्यार है। न्यायालय ने भी इस बात पर टिप्पणी की है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार राजनीतिक लाभ के लिए यह अध्यादेश लेकर आई थी। न्यायालय की दूसरी कठोर टिप्पणी यह है कि तत्कालीन सरकार ने जल्दबाजी में अध्यादेश लाया था, जिसमें ऐसी संवैधानिक गलतियां थीं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।
तीसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश के लोगों, विशेषकर नौजवानों को समझना होगा कि तत्कालीन सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ऐसा कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया, जिसके आधार पर आरक्षण की 50% सीमा को पार किया जा सके। कांग्रेस से मेरा सवाल है कि हम तो आपके साथ मिलकर इस लड़ाई को लड़ते रहे, लेकिन आपने कभी उन संवैधानिक मर्यादाओं की चर्चा क्यों नहीं की? उस समय तक पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल चुका था, लेकिन इसके बावजूद तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने आयोग से सहमति लेना उचित नहीं समझा।
तत्कालीन सरकार की अनदेखी के कारण आज यह स्थिति बनी
पटेल ने कहा कि न्यायालय के फैसले में वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुई नियुक्तियों में कार्यरत लोगों को नौकरी से नहीं हटाने की बात कही गई है। यह निर्णय मुझे उचित लगा है। भविष्य में जो चुनौतियां सामने आएंगी, उनके समाधान और समायोजन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार आवश्यक कदम उठाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार उच्चतम न्यायालय जाएगी -पटेल
पटेल ने कहा कि पहले भी हमारी सरकार ने पूरी जवाबदेही के साथ न्यायालय में अपना पक्ष रखा है और आगे भी जिम्मेदारी के साथ इस लड़ाई को लड़ेगी। कांग्रेस प्रोपेगेंडा पॉलिटिक्स करती है। उसने 50% आरक्षण की संवैधानिक सीमा की अनदेखी की और चुनावी लाभ के लिए जल्दबाजी में अध्यादेश लाया, जिसे अब न्यायालय ने खारिज कर दिया है। हमारे लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील संवैधानिक विषय है। इसलिए राज्य सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जाएगी। इसके पहले भी मध्य प्रदेश सरकार ओबीसी आरक्षण की लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन कांग्रेस जबरन इसका श्रेय लेना चाहती है।
पटेल ने कहा कि इन पांच महत्वपूर्ण बातों का कांग्रेस को जवाब देना होगा। कांग्रेस किसी भी वर्ग की हितैषी नहीं है, वह केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ की हितैषी है।