Edited By meena, Updated: 29 Sep, 2026 07:23 PM

मामले में तेजी से चली विभागीय जांच के बाद आखिरकार देर रात हीरानगर थाना प्रभारी सुशील पटेल पर गाज गिर गई है और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है...
इंदौर (सचिन बहरानी) : हीरानगर थाना क्षेत्र में तोड़फोड़ और हमले के आरोपियों के हाथ पर बंधे कथित फर्जी पट्टे का विवाद अब पुलिस महकमे के अधिकारियों पर भारी पड़ने लगा है। मामले में तेजी से चली विभागीय जांच के बाद आखिरकार देर रात हीरानगर थाना प्रभारी सुशील पटेल पर गाज गिर गई है और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जोन-3 के डीसीपी अभिषेक रंजन ने टीआई सुशील पटेल के निलंबन की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की विस्तृत विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों और खामियों के आधार पर यह सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम उस समय विवादों में आया था जब हीरानगर पुलिस द्वारा कार में तोड़फोड़ और जानलेवा हमला करने के आरोप में गिरफ्तार दो बदमाशों मयंक और शोभित का जुलूस निकाला गया था। जुलूस के दौरान दोनों आरोपियों के हाथों में प्लास्टर(पट्टे)बंधे दिखाई दिए थे, लेकिन जेल दाखिल कराते समय उनका एक वीडियो सामने आ गया।

इस वीडियो में जेल ले जाते वक्त पीसीआर वैन में तैनात सिपाही जफर खान दोनों आरोपियों के हाथों में बंधे पट्टे खोलते हुए नजर आया था। जेल पहुंचने से ठीक पहले पट्टे खुलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस की कार्यप्रणाली और कथित फर्जी पट्टे बांधने की पटकथा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

मामले के तूल पकड़ते ही डीसीपी अभिषेक रंजन ने इसकी गहन जांच एडीसीपी जोन-3 ओमप्रकाश को सौंपी थी। जांच के दौरान एसीपी रुबिना मिजवानी, तत्कालीन टीआई सुशील पटेल, एसआई दिनेश त्रिपाठी समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके साथ ही जांच टीम उस अस्पताल तक भी पहुंची जहां से आरोपियों का मेडिकल कराया गया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस डॉक्टर की सलाह पर पट्टा बांधा गया था। पुलिस रिकॉर्ड और अस्पताल के दस्तावेजों के मिलान में टीआई स्तर पर गंभीर लापरवाही और अनियमितता पाए जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने हीरानगर टीआई सुशील पटेल को निलंबित कर दिया। पुलिस महकमे में हुई इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।