Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Oct, 2026 03:51 PM
मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को नई गति देने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा
भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को नई गति देने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। इस कॉरिडोर के माध्यम से महाकौशल क्षेत्र सहित प्रदेश के कई हिस्सों में उद्योगों की स्थापना, निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित करने की योजना है।
₹100 करोड़ से शुरू होगी परियोजना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि कॉरिडोर के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई कंपनी का गठन किया गया है। यह कंपनी इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में काम करेगी और पूरी तरह राज्य शासन के स्वामित्व में रहेगी। परियोजना की शुरुआत के लिए राज्य सरकार की ओर से ₹100 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है।
कॉरिडोर की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, निर्णय प्रक्रिया को तेज करना और परियोजना के विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार की अन्य कंपनियों के संचालन से मिले अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ भी इस परियोजना में लिया जाएगा।
जबलपुर से इंदौर तक औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
जबलपुर से शुरू होकर भोपाल होते हुए इंदौर तक विस्तारित होने वाला यह कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जबलपुर, नरसिंहपुर से लेकर रायसेन तक के क्षेत्र में उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।
इस क्षेत्र में पर्यटन, खनन, कृषि और भारी उद्योगों से जुड़े कारोबार को विस्तार देने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसके अलावा सड़क, बिजली, पानी और विमानन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती हैं। सरकार की योजना इन सुविधाओं का लाभ निवेशकों तक पहुंचाकर उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने की है।
पहले चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ भूमि होगी विकसित
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाना है। पहले चरण में 3,000 से लेकर 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है। इससे उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार करने और निवेश की संभावनाओं को विस्तार देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश का अनुमान
औद्योगिक कॉरिडोर से बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मार्च 2028 तक इस परियोजना के तहत एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने का अनुमान है। इससे लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इस तरह कुल तीन लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।
तीन साल में तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य
सरकार की दीर्घकालिक योजना भी इस परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण है। आगामी तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और छह लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।
कुल मिलाकर, जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से महाकौशल सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने और नए औद्योगिक केंद्र विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।