Edited By Himansh sharma, Updated: 09 Oct, 2026 02:40 PM
मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक कथित बयान को लेकर हलचल तेज हो गई है।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक कथित बयान को लेकर हलचल तेज हो गई है। करीब 930 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया ने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचूरा पर शराब दुकानों का ठेका दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर सामने आए कथित बयान में 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। दीपम रायचूरा ने इन्हें सिरे से खारिज किया है। मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है। वहीं, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की ओर से आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शराब ठेके के बदले रकम देने का दावा
मोहित गोगिया के कथित बयान के अनुसार, उसकी मुलाकात तनुजा सेठी के माध्यम से दीपम रायचूरा से हुई थी। उस समय रायचूरा आबकारी विभाग में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि इसके बाद रायचूरा ने गोगिया की मुलाकात दीपक दुबे से कराई और उसे बताया कि ठेके से संबंधित कामकाज वही संभालेंगे।
गोगिया ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में स्थित दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई। इसके बदले एक करोड़ रुपये दिए जाने की बात कथित बयान में कही गई है।
50 लाख नकद और 50 लाख रुपये ट्रांसफर करने का आरोप
कथित बयान में भुगतान के तरीके का भी उल्लेख किया गया है। गोगिया के अनुसार, एक करोड़ रुपये में से 50 लाख रुपये नकद दिए गए थे। आरोप है कि यह रकम होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट में दीपक दुबे को सौंपी गई। शेष 50 लाख रुपये ISBT के नजदीक स्थित एक होटल के बैंक खाते में जमा कराने का दावा किया गया है। खबर में इस होटल को दीपम रायचूरा के एक परिचित से जुड़ा बताया गया है। इन लेनदेन और कथित भूमिका की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों तथा जांच के निष्कर्षों से होना बाकी है।
फर्जी FDR और बिना लाइसेंस शराब की बिक्री के आरोप
गोगिया ने अपने कथित बयान में शराब दुकानों के ठेकों के लिए आवश्यक बैंक गारंटी से जुड़े मामले का भी जिक्र किया है। उसका आरोप है कि फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) को मंजूरी दिलाने में दीपम रायचूरा ने सहायता की थी। इसके अलावा, बयान में टीटी नगर की शराब दुकानों पर बिना लाइसेंस शराब की आपूर्ति और बिक्री का भी आरोप लगाया गया है। गोगिया के मुताबिक, रायचूरा ने उसे गौरव शिवहरे से मिलवाया था, जिनके जरिए उसकी मुलाकात कारोबारी अमरीक सिंह से हुई। आरोप है कि अमरीक सिंह ने शराब की आपूर्ति से संबंधित व्यवस्था में मदद की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्लब कारोबार और जांच एजेंसी के नाम पर 50 लाख मांगने का दावा
गोगिया के कथित बयान में उसके नाइट क्लब कारोबार से जुड़ा एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया है। उसने बताया कि सोल क्लब के संचालन के दौरान स्थानीय पुलिस अधिकारियों से उसका संपर्क रहता था और इसी क्रम में उसकी मुलाकात राजेश मिश्रा से हुई थी।
बयान के मुताबिक, जांच एजेंसी की संभावित कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद गोगिया ने सिद्धांत ओझा से संपर्क किया। आरोप है कि सिद्धांत ने उसकी बातचीत ऐसे व्यक्ति से कराई, जिसने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और कार्रवाई रुकवाने के लिए 50 लाख रुपये मांगे।
गोगिया का दावा है कि उसने संबंधित व्यक्ति पर भरोसा करने को लेकर सवाल उठाया था। इसके बाद सिद्धांत ने उसकी बात राजेश मिश्रा से कराई और उनके भरोसे के आधार पर उसने रकम दे दी। हालांकि, कथित बयान में राजेश मिश्रा को सीधे तौर पर रकम मांगने वाला व्यक्ति नहीं बताया गया है। इस पूरे घटनाक्रम की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
करीब 200 लोगों से 930 करोड़ की ठगी का आरोप
मोहित गोगिया पर करीब 200 लोगों के साथ लगभग 930 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वह नाइट क्लब, रेस्टोरेंट और रियल एस्टेट जैसे कारोबार से जुड़ा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह फिलहाल पंजाब की जेल में बंद है।
उसके खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई भी हो चुकी है। जांच के दौरान उसकी संपत्तियां फ्रीज किए जाने की बात सामने आई है। गोगिया के कथित बयान में भोपाल के कुछ कारोबारियों के नामों का भी उल्लेख बताया जा रहा है। हालांकि, किसी बयान में नाम आने भर से संबंधित व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं होती। मामले में जांच और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
दीपम रायचूरा ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत
दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि उन्हें किसी जांच एजेंसी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि गोगिया से उनका परिचय उस समय का हो सकता है, जब वे भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर थे और गोगिया लाइसेंसधारी के रूप में उनसे मिला हो। रायचूरा ने रिश्वत लेने के आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जीतू पटवारी ने CM से की SIT जांच की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोपों में सरकार की विश्वसनीयता निष्पक्ष जांच से स्थापित होती है, केवल बयान जारी करने से नहीं।
अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि कथित बयान में किए गए दावों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है और क्या संबंधित एजेंसियां इन आरोपों की औपचारिक जांच करती हैं। फिलहाल, आरोपों और उनके खंडन के बीच मामले की वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।