क्या MP की इस चर्चित सीट पर फिर होगा उपचुनाव? कांग्रेस विधायक की बढ़ीं मुश्किलें, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Edited By Himansh sharma, Updated: 16 Oct, 2026 05:09 PM

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मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर एक बार फिर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर एक बार फिर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के खिलाफ नामांकन पत्र में पुराने आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से जुड़ा मामला ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस प्रकरण में अदालत की ओर से विधायक को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद से ही दतिया में संभावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, अभी उपचुनाव की स्थिति बनने की पुष्टि नहीं हुई है।

1991 की FIR से जुड़ा है पूरा विवाद

मामले की जड़ वर्ष 1991 में कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उस प्रदर्शन के बाद घनश्याम सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करते समय विधायक ने इस पुराने आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं किया था।

इसी मुद्दे को आधार बनाकर दीपक बेलपत्री सहित कुछ लोगों की ओर से ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में उठाए गए सवालों के संबंध में अदालत ने विधायक से जवाब मांगा है। अब इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में आरोपों को सही साबित नहीं करता। मामले में तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत का निर्णय अहम होगा।

अवधेश नायक ने उठाए राजनीतिक साजिश के सवाल

इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस प्रदेश महासचिव अवधेश नायक का बयान भी सामने आया है। उन्होंने हाईकोर्ट से नोटिस जारी होने को सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताते हुए फिलहाल इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं करने की बात कही।

वहीं, अवधेश नायक ने बीजेपी नेता राजेंद्र भारती की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के माध्यम से राजनीतिक विरोधियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। नायक ने यह दावा भी किया कि वर्ष 2023 में उनका टिकट कटने के पीछे राजेंद्र भारती की भूमिका थी। हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

दतिया की राजनीति में क्यों बढ़ी हलचल?

दतिया विधानसभा सीट पर हाल के चुनावी घटनाक्रम के कारण इस कानूनी विवाद को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में विधायक के खिलाफ सामने आए मामले ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी चर्चाओं को एक नया मुद्दा दे दिया है।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले में आगे चलकर विधायक की सदस्यता पर संकट आ सकता है और क्या दतिया में फिर से चुनाव की नौबत आएगी? फिलहाल इन सवालों का कोई निश्चित जवाब नहीं है। अदालत का नोटिस मिलने मात्र से किसी विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती और न ही उपचुनाव की घोषणा हो जाती है।

आगे की स्थिति याचिका में लगाए गए आरोपों, विधायक के जवाब, अदालत के अंतिम निर्णय और लागू निर्वाचन कानूनों पर निर्भर करेगी। फिलहाल दतिया की राजनीति में इस मामले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। आने वाली सुनवाई में क्या तथ्य सामने आते हैं और अदालत क्या रुख अपनाती है, इसी से आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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