CJP के आंदोलन में दिल्ली जा रहे 8 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस

Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Oct, 2026 03:09 PM

mp high court seeks reply over detention of 8 cjp activists

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे आठ कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे आठ कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हिरासत में लिए गए लोगों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए या उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

इटारसी स्टेशन पर ट्रेन से उतारे गए थे कार्यकर्ता

मामले के अनुसार, CJP से जुड़े आठ कार्यकर्ता पुणे से गोवा एक्सप्रेस में सवार होकर दिल्ली जा रहे थे। उन्हें राजधानी के जंतर-मंतर पर आयोजित आंदोलन में भाग लेना था। इसी यात्रा के दौरान मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को ट्रेन से नीचे उतार लिया और हिरासत में ले लिया।

इस कार्रवाई के बाद कार्यकर्ताओं के परिजनों ने उनकी हिरासत को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। परिजनों की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अलग-अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गईं। इन याचिकाओं के माध्यम से अदालत से मांग की गई कि हिरासत में लिए गए लोगों को पेश करने और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं।

हिरासत के आधार पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मोनीष रघुवंशी ने अदालत के समक्ष पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के पीछे क्या कानूनी आधार था, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। याचिकाकर्ताओं की दलील है कि बिना उचित कानूनी कारण बताए किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला है।

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उद्देश्य भी यही है कि यदि किसी व्यक्ति को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है, तो न्यायालय उसकी स्थिति की जांच कर उचित आदेश दे सके।

12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत ने कार्यकर्ताओं को पेश करने या रिहा करने के संबंध में भी निर्देश दिए हैं। अब सरकार के जवाब और हिरासत से संबंधित परिस्थितियों पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।

इस मामले में 12 अक्टूबर की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उस दिन हिरासत की वैधता और कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर सरकार का पक्ष सामने आ सकता है। फिलहाल, मामले में अंतिम निर्णय आना बाकी है।

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