Edited By Himansh sharma, Updated: 01 Oct, 2026 06:14 PM

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है।
राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला कर्मचारी की मृत्यु के कई महीने बाद तक सरकारी खजाने से उसके बैंक खाते में नियमित रूप से वेतन भेजा जाता रहा। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारी की मौत की सूचना विभाग को दिए जाने और उपस्थिति रजिस्टर से उसका नाम हट जाने के बावजूद वेतन भुगतान का सिलसिला नहीं रुका। मामले की जांच पूरी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. शोमा पटेल और अकाउंटेंट दिनेश पारिक को निलंबित कर दिया है।
यह पूरा मामला नरसिंहगढ़ क्षेत्र के लसूडला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। यहां सुमित्रा बाई स्वीपर के पद पर कार्यरत थीं। जनवरी 2025 में उनका निधन हो गया था। कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचा दी गई थी। इतना ही नहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हाजिरी रजिस्टर में भी उनकी अंतिम उपस्थिति 15 जनवरी 2025 दर्ज थी। इसके बाद उनकी कोई उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।
इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड और वेतन भुगतान की प्रक्रिया में ऐसी चूक हुई कि मृत महिला कर्मचारी के बैंक खाते में अक्टूबर 2025 तक हर महीने वेतन पहुंचता रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके खाते में प्रतिमाह 14,844 रुपये जमा किए जा रहे थे। इस तरह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी कई महीनों तक सरकारी राशि का भुगतान जारी रहने का मामला सामने आया।
तीन सदस्यीय जांच टीम ने सौंपी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया था। टीम ने उपलब्ध दस्तावेजों, वेतन भुगतान और विभागीय जिम्मेदारियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में प्रभारी CMHO डॉ. शोमा पटेल की भूमिका पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, उनके स्तर पर पद के दुरुपयोग और विभागीय लापरवाही के कारण शासन को आर्थिक नुकसान हुआ।
जांच निष्कर्षों के आधार पर विभाग ने गुरुवार को डॉ. शोमा पटेल और अकाउंटेंट दिनेश पारिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया। निलंबन अवधि के दौरान डॉ. शोमा पटेल का मुख्यालय भोपाल निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा।
वेतन भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी विभागों में कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी, मृत्यु के बाद रिकॉर्ड अपडेट करने और वेतन भुगतान की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कर्मचारी की मृत्यु की सूचना विभाग को मिल चुकी थी और उपस्थिति रजिस्टर में भी इसका स्पष्ट संकेत मौजूद था, तब भी कई महीनों तक वेतन जारी रहना प्रशासनिक प्रक्रिया में गंभीर चूक की ओर इशारा करता है। फिलहाल जांच रिपोर्ट के आधार पर दो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। राजगढ़ का यह मामला सरकारी धन के भुगतान और विभागीय जवाबदेही से जुड़ी व्यवस्थाओं की गंभीरता को सामने लाता है।