Edited By Vikas Tiwari, Updated: 28 Mar, 2026 05:57 PM

मंडला जिले के रामनगर के पास स्थित चौगान की मढ़िया नवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था और भक्ति का विशाल केंद्र बन गई है। गोंडवाना राजवंश की प्राचीन राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में इन दिनों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। यहाँ आदिवासी...
मंडला (अरविंद सोनी): मंडला जिले के रामनगर के पास स्थित चौगान की मढ़िया नवरात्रि के पावन अवसर पर आस्था और भक्ति का विशाल केंद्र बन गई है। गोंडवाना राजवंश की प्राचीन राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में इन दिनों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। यहाँ आदिवासी समाज की गोंडी संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

नवरात्रि के दौरान महिला और पुरुष सफेद वस्त्र धारण कर माँ वेदिनी माता की भक्ति में लीन रहते हैं। इस वर्ष 3720 से अधिक जवारे निकाले गए, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लिया। यह विशाल जनसमूह करीब तीन किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए माँ नर्मदा के तट तक पहुंचा, जहाँ पूरे विधि-विधान के साथ जवारे का विसर्जन किया गया। आस्था, अनुशासन और भक्ति से भरा यह नजारा हर किसी को आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है। चौगान की मढ़िया न सिर्फ मंडला, बल्कि पूरे प्रदेश और अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। गोंडी परंपरा के अनुसार सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करना शांति, पवित्रता और आत्मिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, यह स्थल गोंडवाना शासनकाल से जुड़ा एक प्राचीन धार्मिक केंद्र है, जहाँ हर साल नवरात्रि में हजारों लोग जवारे बोते हैं और विसर्जन के लिए नर्मदा तट तक जाते हैं। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद प्रशासनिक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हो पातीं, जिसके चलते स्थानीय लोग ही आगे आकर व्यवस्थाएं संभालते हैं।