Edited By Vikas Tiwari, Updated: 18 Feb, 2026 01:20 PM

छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा-2024 के पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक 7 जनवरी 2024 को आयोजित परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र पैसे लेकर लीक कर दिए गए थे।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा-2024 के पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक 7 जनवरी 2024 को आयोजित परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र पैसे लेकर लीक कर दिए गए थे।
जांच में सामने आया है कि 100 से ज्यादा अभ्यर्थियों तक लीक पेपर पहुंचाया गया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण से पता चला कि परीक्षा से एक रात पहले यानी 6 जनवरी 2024 को कई अभ्यर्थियों और आरोपियों की लोकेशन एक ही स्थान पर थी। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया गया था। ACB-EOW ने इस मामले में रायपुर के स्पेशल कोर्ट में करीब 3,000 पन्नों का चालान पेश किया है।
वरिष्ठ अधिकारी के घर टाइप हुआ प्रश्नपत्र, फॉर्म हाउस में ठहराए कैंडिडेट्स
जांच में सहायक सांख्यिकी अधिकारी वीरेंद्र जाटव और हेमंत कुमार कौशिक को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि वीरेंद्र जाटव ने प्रश्नपत्र एक वरिष्ठ अधिकारी के घर पर टाइप किया और परीक्षा से पहले ही अवैध तरीके से चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया। जांच एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों को रायपुर के होटल, फार्महाउस और रिजॉर्ट में ठहराया गया। वहीं उन्हें प्रश्नपत्र पढ़ाया गया और नोट्स बनवाए गए। अभ्यर्थियों को निर्देश दिया गया था कि लिखे गए सवालों को परीक्षा से पहले जला दें, ताकि कोई सबूत न बचे। इस पूरे काम में आरोपियों के रिश्तेदारों की भी मदद ली गई।
डिजिटल सबूत और CDR से पुष्टि, उत्तर पुस्तिकाओं में समान पैटर्न
डिजिटल साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि प्रश्नपत्र विभिन्न माध्यमों से पहुंचाया गया और इसके बदले धनराशि ली गई। कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डाटा ने जांच को मजबूत आधार दिया है। जिन अभ्यर्थियों को एक साथ ठहराया गया था, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं में समानता पाई गई। सिर्फ अंक ही नहीं, बल्कि सही और गलत उत्तरों का पैटर्न भी एक जैसा था, जिससे एक ही उत्तर कुंजी से तैयारी किए जाने का संकेत मिलता है।
छापेमारी और मनी ट्रेल की जांच जारी
19 नवंबर 2025 को संयुक्त टीम ने रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग समेत सात जिलों में 19 ठिकानों पर छापा मारा था। अनियमित चयन और अवैध संपत्ति अर्जन की शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। फिलहाल मनी ट्रेल और अन्य अधिकारियों व राजस्व निरीक्षकों की भूमिका की जांच जारी है।
ऐसे शुरू हुआ मामला
7 जनवरी 2024 को आयोजित विभागीय परीक्षा में 2,600 से ज्यादा पटवारियों ने भाग लिया था। 29 फरवरी 2024 को घोषित परिणाम में 216 पटवारियों का चयन प्रशिक्षण के लिए हुआ। इसके बाद राजस्व पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप ने रिश्तेदारों के चयन और अनियमितताओं की शिकायत करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। जांच कमेटी ने 22 चयनितों पर सवाल उठाए, जबकि विधानसभा में यह संख्या 13 बताई गई। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां ट्रेनिंग शुरू करने के निर्देश दिए गए। अंततः शासन ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए यह मामला तीसरी बार EOW/ACB को सौंप दिया। अब इस पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियों पर सबकी नजरें टिकी हैं।