Edited By Vikas Tiwari, Updated: 14 Feb, 2026 06:51 PM

मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया विश्लेषण में सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में सड़क हादसों में करीब 18% की वृद्धि हुई है, जबकि हादसों में मौतों का आंकड़ा लगभग 22% तक बढ़ा है।
भोपाल: मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया विश्लेषण में सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में सड़क हादसों में करीब 18% की वृद्धि हुई है, जबकि हादसों में मौतों का आंकड़ा लगभग 22% तक बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, खराब सड़कें, अपर्याप्त साइनबोर्ड, और रात में लाइटिंग की कमी हादसों की बड़ी वजह बन रही है। कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर गड्ढों की समस्या बरकरार है, वहीं ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर नियंत्रण भी चुनौती बना हुआ है। प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में ओवरस्पीडिंग और शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में हेलमेट और सीट बेल्ट का पालन बेहद कम है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल चालान काटना समाधान नहीं है। सड़क डिजाइन, ब्लैक स्पॉट की पहचान, नियमित ऑडिट और आपातकालीन मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। सरकार ने कई स्थानों पर स्पीड कैमरे और सीसीटीवी लगाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या बढ़ते हादसों को रोकने के लिए सख्त और समन्वित कार्रवाई होगी, या ‘डेथ हाईवे’ का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?