Edited By Vikas Tiwari, Updated: 03 Feb, 2026 06:30 PM

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की है। जमानत की शर्तों के अनुसार...
रायपुर: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की है। जमानत की शर्तों के अनुसार कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, हालांकि कोर्ट में पेशी के दौरान वे राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
लखमा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस मामले में मंगलवार को करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था और 7 दिन की रिमांड के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। तब से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।
पूर्व CM बघेल बोले- सत्य की जीत हुई
जमानत मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आदेश एक बार फिर साबित करता है कि संघर्ष कितना भी कठिन हो, अंततः जीत सत्य की ही होती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी को लेकर ED को कड़ी फटकार भी लगाई थी।
जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। ED ने इस मामले में एसीबी (ACB) में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप है। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि शराब नीति और लाइसेंस व्यवस्था में हेरफेर कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया और अवैध कमाई की गई।