Edited By Desh sharma, Updated: 22 Jan, 2026 10:36 PM

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतो को लेकर नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान मध्य प्रदेश के साथ ही पूरे देश में गूंजा। इस बयान से बीजेपी की खासी किरकिरी हुई और कैलाश विजयवर्गीय को भी तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन अब कैलाश के...
(डेस्क): इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतो को लेकर नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान मध्य प्रदेश के साथ ही पूरे देश में गूंजा। इस बयान से बीजेपी की खासी किरकिरी हुई और कैलाश विजयवर्गीय को भी तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। लेकिन अब कैलाश के साथ एक और नया खेल हो गया है।
दरसअल मध्यप्रदेश में 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडा फहराने की जो आधिकारिक सूची जारी हुई है उसमें मंत्री कैलाश का नाम ही नहीं हैं। जी हां सूची से नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी का नाम पूरी तरह गायब है। हालत ये है कि अपने ही प्रभार वाले जिले धार और सतना में मंत्री कैलाश नहीं बल्कि कलेक्टर झंडा फहराएंगे।
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा इंदौर में फहराएंगे झंडा
इंदौर, जिसे विजयवर्गीय का राजनीतिक गढ़ कहा जाता है वहाँ की जिम्मेदारी प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा को दे दी गई है। जबकि सीएम मोहन यादव खुद उज्जैन में झंडा फहराएंगे।राजेंद्र शुक्ल सागर में झंडा फहराएंगे।
चर्चा में आ गया कैलाश विजयवर्गीय की ओर से जारी पत्र

इसी बीच कैलाश विजयवर्गीय की ओर से एक पत्र जारी हुआ है जो काफी चर्चा में आ गया है। इस लेटर में कहा गया है कि मंत्री कैलाश के किसी निकट पारिवारिक सदस्य का दिनांक 20-01-2026 को निधन हो गया है, जिसके चलते मंत्री जी आगामी कुछ दिनों तक किसी भी सामाजिक या सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होगें। लेकिन यहां पर जो समझने वाली बात है, वो ये कि पहले झंडा वंदन की सूची से कैलाश का नाम गायब होता है, वहीं दूसरी ओर कैलाश विजयवर्गीय की ओर से ऐसा लेटर जारी हो जाता है।
तारीखों का खेल समझना जरूरी
अब इस कहानी में तारीखों का खेल समझते हैं। गणतंत्र दिवस से जुड़ा सरकारी आदेश 21 जनवरी को जारी होता है। लेकिन सफ़ाई देने के लिए जो लेटर सामने लाया जाता है, उस पर तारीख डाली जाती है 20 जनवरी की।जबकि वही लैटर 21 जनवरी की रात मीडिया में जारी किया गया।
इंदौर विवादित बयान पर बीजेपी आलाकमान पहले ही विजयवर्गीय से खफा
लिहाजा राजनीति में कुछ संयोग नहीं होता, जब नाम लिस्ट से गायब होता है, तो समझ लीजिए कुछ न कुछ अंदरखाते चल रहा है। फिलहाल समझा जा सकता है कि कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर विवादित बयान का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। किसी भी जिले में झंडा वंदन की जिम्मेवारी न मिलना और फिर लेटर जारी करके हवाला देना कोई कई सवाल खड़े कर रहा है । लिहाजा इसे राजनीतिक खेला समझा जा रहा है, क्योंकि काग़ज़ सब कुछ बोल रहे हैं।
फिलहाल ये प्रदेश सरकार पर RSS का दवाब था या दिल्ली से आदेश आया है इसके बारे में साफ नहीं हो पाया है। लेकिन ये साफ है कि कैलाश को अपने बयान को लेकर ये दिन देखना पड़ा है।