Edited By Desh Raj, Updated: 23 Feb, 2026 08:11 PM

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने नरवाई को लेकर किसानं से अपील की है। उन्होंने नरवाई को जैविक खाद बनाने में सदुपयोग करने की सलाह दी है। कंसाषा ने कहा कि किसान लगातार उन्नत खेती करें और प्रदेश की समृद्धि में अपना योगदान दें। लेकिन इसके...
(भोपाल): मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने नरवाई को लेकर किसानं से अपील की है। उन्होंने नरवाई को जैविक खाद बनाने में सदुपयोग करने की सलाह दी है। कंसाषा ने कहा कि किसान लगातार उन्नत खेती करें और प्रदेश की समृद्धि में अपना योगदान दें। लेकिन इसके साथ ही कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने किसानों को नरवाई जलाने को लेकर चेताया भी है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर सजा का प्रावधान है इसलिए नरवाई का सदुपयोग करें। प्रदेश को आगे बढाने वालें कामों पर फोकस करें। दरअसल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने किसानों से स्टेट में आयोजित किए जा रहे कृषि विज्ञान मेलों का फायदा उठाने और उन्नत खेती करने के लिए प्रोत्साहन देने की बात कही है।
कंषाना ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष 2026 में कृषि नवाचार और उन्नत खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेशभर में कृषि विज्ञान मेलों का आयोजन किया जा रहा है। जिलास्तर पर ये मेले आयोजित किए जा रहे हैं। इन मेलों का लाभ उठाकर निरंतर उन्नत खेती करें और प्रदेश की समृद्धि में अपना योगदान दें। इसके साथ ही कृषि मंत्री कंषाना ने किसानों को नरवाई जलाने को लेकर भी समझाइस दी है औऱ कहा है कि नरवाई जलाने पर सजा का प्रावधान है, इसलिए किसान नरवाई का सदुपयोग ही करें।
कृषि मंत्री एदलसिंह कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों की समृद्धि और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।दोनों सरकारें किसानों के लिए कई किसान हितैषी योजनाएं चला रहीं हैं।कंषाना ने कहा कि मिश्रित खेती की पारंपरिक पद्धति ही भूमि की उर्वरता के लिए उपयोगी होती है।
लेकिन आज के दौर में रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के उपयोग से भूमि की गुणवत्ता के साथ आदमी का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। इसलिए उन्होंने किसानों से जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया है।
नरवाई पर किसानों को चेताया भी
कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि प्रदेश में नरवाई जलाना प्रतिबंधित किया गया है क्योंकि इससे भूमि की उर्वरकता को नुकसान पहुंचता है । ऐसा करने पर सजा का प्रावधान है।