Edited By Desh Raj, Updated: 09 Mar, 2026 11:55 PM

मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक के लिए एक राहत भरी खबर आई है। दरअसल राजधानी भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के लिए अच्छा फैसला आया है, उनके खिलाफ एफआइआई का आदेश निरस्त कर दिया गया है।
(जबलपुर): मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक के लिए एक राहत भरी खबर आई है। दरअसल राजधानी भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के लिए अच्छा फैसला आया है, उनके खिलाफ एफआइआई का आदेश निरस्त कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलटते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसके तहत कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के विरुद्ध एफआइआर के निर्देश दिए गए थे। मामला फर्जी सेल डीड पर इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल चंदूरकर की युगलपीठ का आदेश
आपको बता दें कि यह मामला फर्जी सेल डीड पर इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त भोपाल को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। साथ ही कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को एसआईटी (SIT) गठित करने के लिए भी कहा था। हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ आरिफ मसूद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल चंदूरकर की युगलपीठ ने आरिफ मसूद के लिए यह राहत भरा आदेश सुनाया है।
सरकार का जवाब आने से पहले ऐसे अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं-सुप्रीम कोर्ट
मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब आने से पहले ही इस तरह के अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं थी। हाई कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाते हुए पुलिस कमिश्नर को एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
आखिर क्या था पूरा मामला?
दरअसल इंदिरा प्रियदर्शी कालेज, भोपाल की मान्यता निरस्त किए जाने के खिलाफ कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद हाई कोर्ट गए थे, लेकिन मसूद को हाईकोर्ट से राहत मिलन के बजाय एफआईआर के निर्देश दे दिए थे।
लिहाजा सुप्रीम कोर्ट में आरिफ का पक्ष विवेक तन्खा ने रखा। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने मामले में सरकार का जवाब आने से पहले ही एफआईआर दर्ज करने के साथ ही एसआईटी गठित करने का आदेश दिया, जो कि सही नहीं है। सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी तर्क सही माना और मसूद के खिलाफ एफआइआई आदेश निरस्त कर दिया।