अब मुफ्त सेवा बंद! ‘आयुष्मान’ और ‘BPL कार्ड’ वालों को जेब से देना होगा पैसा

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 17 Feb, 2026 12:45 PM

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल (जेपी अस्पताल) में नि:शुल्क एमआरआइ जांच सेवा अचानक बंद कर दी गई है। पीपीपी मॉडल पर संचालित एमआरआइ सेंटर ने ओपीडी के आयुष्मान भारत और बीपीएल कार्डधारक मरीजों की मुफ्त जांच करने से इनकार कर दिया है।

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के जयप्रकाश जिला अस्पताल (जेपी अस्पताल) में नि:शुल्क एमआरआइ जांच सेवा अचानक बंद कर दी गई है। पीपीपी मॉडल पर संचालित एमआरआइ सेंटर ने ओपीडी के आयुष्मान भारत और बीपीएल कार्डधारक मरीजों की मुफ्त जांच करने से इनकार कर दिया है।

अब जरूरतमंद मरीजों को एमआरआइ जांच के लिए कम से कम 1500 रुपए और जांच की प्रकृति के अनुसार 3000 से 6000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

भुगतान लंबित, एजेंसी ने खड़े किए हाथ
जानकारी के मुताबिक सरकार की ओर से करीब 50 लाख रुपए से अधिक का भुगतान लंबित है। भुगतान नहीं मिलने के कारण एजेंसी ने मुफ्त जांच सेवाएं रोक दी हैं। हाल ही में सात-आठ मरीजों को एमआरआइ जांच से साफ इनकार कर दिया गया, जिससे उनका इलाज प्रभावित हुआ। सेंटर संचालक एजेंसी के ऑपरेशन हेड रतन सिंह (कृष्णा डायग्नॉस्टिक सेंटर) का कहना है कि पिछले एक साल से भुगतान नहीं मिला है। मशीनों की ईएमआइ, रखरखाव और स्टाफ वेतन का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकला, इसलिए मजबूरी में मुफ्त सेवा बंद करनी पड़ी।

इंदौर और ग्वालियर में भी असर
भुगतान अटकने का असर सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में भी आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों की एमआरआइ सेवाएं प्रभावित हुई हैं। तीनों जिलों में निजी एजेंसियों का दो करोड़ रुपए से अधिक भुगतान बकाया बताया जा रहा है। यदि जल्द बजट जारी नहीं हुआ, तो सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका है।

प्रशासन का आश्वासन
सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि बकाया भुगतान का मामला संज्ञान में है। भुगतान राज्य स्तर से जारी होता है, इसलिए प्रक्रिया में समय लग रहा है। संबंधित विभाग और आयुष्मान सेल से समन्वय कर जल्द बजट जारी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके। फिलहाल मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए निजी खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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