गृहमंत्री शाह बोले- भारत सरकार किसी पर गोली चलाना नहीं चाहती, नक्सली हथियार डाल दें, रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेंगे

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 08 Feb, 2026 08:34 PM

chhattisgarh from naxal hub to development  amit shah

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वामपंथी उग्रवाद (LWE) को लेकर उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसके साथ ही राज्य में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वामपंथी उग्रवाद (LWE) को लेकर उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसके साथ ही राज्य में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव, आईबी डायरेक्टर, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, CRPF, NIA, BSF, ITBP के महानिदेशक सहित छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक मौजूद रहे। बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केन्द्र और छत्तीसगढ़ सरकार की सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर कड़ा प्रहार और प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 से पहले देश पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाएगा। अमित शाह ने कहा कि कभी नक्सली हिंसा का गढ़ रहा छत्तीसगढ़, आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार के चलते विकास का पर्याय बन चुका है। गृह मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के युवा अब खेल, फॉरेंसिक और तकनीकी शिक्षा में आगे बढ़ रहे हैं और अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी सहेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने देश की कई पीढ़ियों को गरीबी और अशिक्षा के अंधकार में धकेला, लेकिन अब देश इस अभिशाप से मुक्ति के बेहद करीब है।

मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि माओवाद के खिलाफ लड़ाई बिखरी हुई नहीं होनी चाहिए और केन्द्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि बचे हुए नक्सली एक राज्य से दूसरे राज्य में भाग न सकें। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति की है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें।

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