Edited By Desh sharma, Updated: 27 Jan, 2026 03:07 PM

श के उच्चतम न्यायालय ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में VIP एंट्री के प्रवेश को लेकर की गई याचिका पर बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
(डेस्क): देश के उच्चतम न्यायालय ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में VIP एंट्री के प्रवेश को लेकर की गई याचिका पर बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया कि मंदिर में कौन प्रवेश करेगा, यह तय करना अदालत का काम नहीं है।
आपको बता दें कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की लंबे समय से मांग हो रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है।
देश के सर्वोच्च न्यायालय ने बिल्कुल साफ करते हुए कहा कि किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है और इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महाकाल मंदिर को लेकर 3 जजों की बेंच ने की सुनवाई
आपको बता दें कि 3 जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ता ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए मामले में वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए अहम टिप्पणी की है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि धार्मिक रीति-रिवाजों और मंदिर में प्रवेश की व्यवस्था तय करना ऐसा मामला नहीं है, जिस पर ‘‘न्यायालय फैसला करे।'' याचिका में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें भगवान महाकाल पर जल चढ़ाने के लिए अतिविशिष्ट हस्तियों को दी जाने वाली प्राथमिकता के खिलाफ आपत्तियां खारिज कर दी गई थीं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की बहुत अहम टिप्पणी
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में न्यायालय के हस्तक्षेप की एक सीमा होती है और ऐसे मुद्दों पर फैसला उन लोगों को करना है जो व्यवस्था संभालते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वीआईपी प्रवेश की अनुमति होनी चाहिए या नहीं, यह अदालत तय नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम यह मान लें कि अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) गर्भगृह के भीतर लागू होता है तो लोग अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) जैसे दूसरे अधिकार भी मांगने लगेंगे।
याचिकाकर्ता ने VIP दर्शन पर उठाए थे सवाल
याचिकाकर्ता का कहना था कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को आसानी से एंट्री मिल जाती है. लेकिन आम जनता को इसका अधिकार नहीं है। उन्हें दूर से ही दर्शन करके वापस लौटना पड़ता है, जो पूरी तरह से गलत है।