पिता ने अपनी विधवा बेटी का किया पुनर्विवाह, तो समाज ने किया बहिष्कार, 10 साल तक गांव में नो एंट्री

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 13 Feb, 2026 03:20 PM

family boycotted in balaghat for arranging widow daughter s remarriage

आजादी के 78 वर्ष बाद भी समाज से कुरीतियां पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं। बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र स्थित मंडई टेकरी में एक पिता को अपनी विधवा बेटी की दोबारा शादी कराना भारी पड़ गया। समाज ने पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया और 25 हजार रुपये का...

बालाघाट: आजादी के 78 वर्ष बाद भी समाज से कुरीतियां पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं। बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र स्थित मंडई टेकरी में एक पिता को अपनी विधवा बेटी की दोबारा शादी कराना भारी पड़ गया। समाज ने पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ 10 वर्ष का सामाजिक प्रतिबंध भी लगा दिया।

पीड़ित पिता मानिक सोनवाने ने मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की है। कलेक्टर मृणाल मीना ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। मानिक सोनवाने ने बताया कि उनकी बेटी की शादी पहले हो चुकी थी, लेकिन वर्ष 2022 में बीमारी के कारण दामाद का निधन हो गया। उस समय बेटी की उम्र मात्र 22 वर्ष थी। बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए उन्होंने उसका पुनर्विवाह कराया, जिसके बाद बिंझवार समाज के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष ने बैठक कर परिवार के बहिष्कार का निर्णय सुना दिया।

इस फैसले के तहत परिवार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना और 10 साल का सामाजिक बहिष्कार लागू किया गया। इसी तरह का एक अन्य मामला 3 फरवरी को लालबर्रा के देवरी गांव में सामने आया था, जहां फोगल बाहेश्वर ने अपने भांजे का अंतरजातीय विवाह कराया था। इसके बाद मरार समाज ने उसे भी बहिष्कृत कर दिया। इस मामले की जांच भी जारी है। 21वीं सदी में जब देश डिजिटल इंडिया और अंतरिक्ष मिशनों की बात कर रहा है, ऐसे में सामाजिक बहिष्कार और जुर्माने जैसे फैसले संविधान और कानून की भावना पर सवाल खड़े करते हैं। प्रशासन ने दोनों मामलों में जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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