Edited By meena, Updated: 29 Jan, 2026 06:15 PM

छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है...
रायपुर : छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
सूत्रों के अनुसार, गोपाल साहू का पिछले कुछ दिनों से पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी के साथ मतभेद चल रहा था। माना जा रहा है कि यही अनबन उनके इस्तीफे की मुख्य वजह हो सकती है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोपाल साहू को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। उस समय पार्टी के राष्ट्रीय सचिव संदीप पाठक, प्रदेश प्रभारी संजीव झा और प्रभारी हरदीप सिंह की अनुशंसा पर प्रदेश संगठन में अन्य पदाधिकारियों की भी नियुक्ति की गई थी।
हाल ही में सक्रिय दिख रही थी AAP
बीते दिनों आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ में फिर से सक्रिय होती नजर आ रही थी। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सह प्रभारी मुकेश अहलावत जुलाई में कोरबा दौरे पर पहुंचे थे। टीपी नगर स्थित प्रेस क्लब तिलक भवन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया था कि आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ में किसी भी बड़ी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी।
मुकेश अहलावत ने कहा था कि पिछली बार गठबंधन के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा थी, लेकिन अब संगठन को मजबूत कर स्वतंत्र राजनीति की राह चुनी गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि छत्तीसगढ़ में चुनाव के लिए अभी साढ़े तीन साल का समय है और पार्टी जमीनी मुद्दों को लेकर सक्रिय रूप से सड़क की लड़ाई लड़ेगी। उस दौरान प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। ऐसे में अब उनके इस्तीफे से पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पार्टी को संगठनात्मक नुकसान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोपाल साहू का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पार्टी छत्तीसगढ़ में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। इस इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।