Edited By Vikas Tiwari, Updated: 19 Feb, 2026 01:49 PM

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। वर्ष 2019 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है और कहा है...
भोपाल: मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। वर्ष 2019 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है और कहा है कि अंतिम फैसला हाईकोर्ट ही करेगा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला लंबे समय से “पिंग-पोंग बॉल’ की तरह इधर-उधर घूम रहा है, जो उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि अब इस पर ठोस निर्णय होना चाहिए। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 87-13 फॉर्मूला लागू करते हुए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया था और शेष 13 प्रतिशत को होल्ड पर रखा गया था। इससे पहले हाईकोर्ट ने 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगा दी थी, क्योंकि यह कुल आरक्षण सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो रहा था।
अनारक्षित वर्ग की ओर से दलील दी गई थी कि 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। वहीं, ओबीसी वर्ग लंबे समय से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की विस्तृत सुनवाई हाईकोर्ट में होनी चाहिए और वहीं अंतिम निर्णय लिया जाए। अब सभी पक्षों की निगाहें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पर टिक गई हैं, जहां इस संवेदनशील मुद्दे पर निर्णायक सुनवाई होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि आने वाला निर्णय हजारों अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रियाओं पर सीधा असर डाल सकता है।