रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं नवाचारी विचार: राज्यपाल

Edited By meena, Updated: 28 Sep, 2026 06:57 PM

innovative ideas can become an effective medium for employment generation and ec

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि यदि युवाओं के नवाचार को उचित मार्गदर्शन, पूंजी और संस्थागत सहयोग मिले तो उनके विचार...

रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह) : छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि यदि युवाओं के नवाचार को उचित मार्गदर्शन, पूंजी और संस्थागत सहयोग मिले तो उनके विचार रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। डेका ने कहा कि वास्तविक आत्मनिर्भरता तभी संभव है जब नवाचार और उद्यमिता के अवसर राज्य के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचें। उन्होंने विशेष रूप से आदिवासी बहुल बस्तर तथा सरगुजा और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से उभरते नवाचारों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवाचार एवं उद्यमिता विकास की सबसे ज्यादा संभावनाएं कृषि आधारित उद्योगों में है, इनसे किसानों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक लाभ मिलेगा। राज्यपाल डेका आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि मंडपम में 28 से 30 सितम्बर तक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के सहयोग से आयोजित “छत्तीसगढ़ यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव 2026” के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। डेका ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रथम एवं एकमात्र बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर-केंद्रित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर के नवनिर्मित भवन का शुभारंभ भी किया। यह केंद्र प्रदेश में बायोटेक्नोलॉजी आधारित अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप विकास एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत आधार के रूप में कार्य करेगा। डेका ने इन्क्यूबेशन सेंटर में निर्मित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं एवं सुविधाओं का अवलोकन भी किया।

राज्यपाल डेका ने यूथ कॉन्क्लेव के दौरान युवा नेतृत्व वाले उद्यमों और संस्थागत नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी” का शुभारंभ भी किया। उन्होंने प्रदर्शनी में 24 से अधिक स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शित नवाचार, तकनीक और समाधानों का अवलोकन करते हुए युवा उद्यमियों, से उनसे स्टार्टअप के बारे में जानकारी प्राप्त की और उनका उत्साहवर्धन किया। यूथ कॉन्क्लेव 2026 में छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य भागों से 1200 से अधिक युवा छात्र, नवाचारी उद्यमि एवं स्टार्टअप स्थापित करने के आकांक्षी युवा शामिल हुए हैं। इस अवसर पर विधायक धरसींवा अनुज शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी एवं नाबार्ड छत्तीसगढ़ के मुख्य महाप्रबंधक डी. के गावली भी उपस्थित थे।

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यूथ कॉन्क्लेव 2026 में शामिल युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल डेका ने कहा कि वे शुरुआती असफलताओं से निराश न हों, बल्कि साहस के साथ शुरुआत करें, निरंतर प्रयास करते रहें और अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन प्राप्त करें। उन्होंने वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत और निवेशकों से भी युवाओं की क्षमता एवं पूंजी के बीच मजबूत सेतु बनाने का आग्रह किया। डेका ने ’’आईजीकेवी आरकेवीवाई-रफ्तार एग्री बिजनेस इनक्यूबेटर (आईजीकेवी आर-एबीआई)’’ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने अब तक 400 से अधिक कृषि-आधारित स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है। इनमें 129 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिली है तथा 14.93 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। संस्थान के प्रयासों से 1,000 से अधिक उत्पाद विकसित हुए हैं, 93 महिला संस्थापकों को सहयोग मिला है और स्टार्टअप्स ने 85 पुरस्कार प्राप्त किए हैं। राज्यपाल ने कहा कि इन प्रयासों का प्रभाव एक लाख से अधिक किसानों तक पहुंचा है तथा 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 7,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। संबंधित स्टार्टअप्स ने 200 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी राजस्व अर्जित किया है और 27.06 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है। राज्यपाल ने स्टार्टअप पिचिंग प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए आशा व्यक्त की कि यह कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़ के युवा उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं का मंच बनेगा।

विधायक अनुज शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि यूथ कॉन्क्लेव 2026 छत्तीसगढ़ में युवा उद्यमिता विकास एवं नवाचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के साथ आईआईटी भिलाई, एनआईटी रायपुर तथा आईआईआईटी नवा रायपुर जैसे प्रौद्योगिकी संस्थानों के एक मंच पर आने से यह आयोजन छत्तीसगढ़ में स्टार्टअप्स क्रांति का सूत्रधार बनेगा।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में लगभग 1,200 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। इस मंच पर विद्यार्थी, युवा उद्यमी, स्टार्टअप्स, नवोन्मेषक, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि तथा विभिन्न संस्थाएं एक साथ जुड़ रही हैं। 24 से अधिक स्टार्टअप्स अपने नवाचार, तकनीक और समाधानों का प्रदर्शन कर रहे हैं तथा उन्हें अपने विचारों और व्यावसायिक मॉडलों की पिचिंग का अवसर भी मिल रहा है। डॉ. चंदेल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी बनाने के लिए आवश्यक मेंटरशिप, निवेश, तकनीकी सहयोग, बौद्धिक संपदा संरक्षण, वित्तीय एवं बाजार संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक समग्र मंच तैयार करना है। डॉ. चंदेल ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पिछले चार दशकों से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि प्रयोगशालाओं और क्षेत्र में विकसित ज्ञान एवं तकनीक समाज तक पहुंचे, उत्पाद और उद्यम में परिवर्तित हो तथा किसानों एवं ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हों। समारोह को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी ने भी संबोधित किया।

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शुभारंभ समारोह के दौरान आईजीकेवी राबी द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से चयनित तीन स्टार्टअप्स को 25-25 लाख रूपये ग्रांट-इन-एड सहायता के चेक प्रदान किये गए जिनमें एनएसबी कंज्यूमर प्रोडक्ट प्राईवेट लिमिटेड, जेएच इन्क्यूबेटरर्स एन्ड मशरूम्स प्राईवेट लिमिटेड और अगोरा इको टूरिज्म प्राईवेट लिमिटेड शामिल  हैं। इसके साथ ही आईजीकेवी राबी के इन्क्यूबेशन चरण सफलता पूर्वक पूर्ण करने वाले पांच स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन ग्रेजूएशन सर्टिफिकेट भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कृषि महाविद्यालय रायपुर द्वारा प्रकाशित इंर्फोमेशन ब्रोशर और ग्रामीण उद्यमिता पर केंद्रित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डाॅ. वी.के. त्रिपाठी ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि “यूथ कॉन्क्लेव 2026” नवाचार अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय पहल है। कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, इनक्यूबेटर्स, शिक्षाविदों तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इस मंच के माध्यम से नवीन विचारों, अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों को व्यावसायिक अवसरों एवं सफल उद्यमों में परिवर्तित करने के साथ-साथ राज्य में एक सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में सहायता प्राप्त होगी। कॉन्क्लेव में विशेष रूप से कृषि एवं एग्री टेक, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु स्मार्ट तकनीक, फिनटेक तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम में कुल चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों का व्याख्यान, स्टार्टअप प्रदर्शनी, स्टार्टअप पिचिंग, निवेशक/स्टार्टअप संवाद, नीति संवाद, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन सत्र तथा उत्कृष्ट नवाचारों एवं स्टार्टअप्स को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। तीन शीर्ष युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को क्रमशः एक लाख रूपये, पचहत्तर हजार रूपये तथा पचास हजार रूपये की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।

सुभाषचंद्र बोस इनक्यूबेशन सेंटरः अत्याधुनिक बायोटेक्नोलॉजी सुविधाओं से सुसज्जित केंद्र

सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर दो एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। यह केंद्र जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए एक समर्पित मंच के रूप में कार्य करेगा। यहां हाई-टेक एवं अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, ठैस.3 सुविधा, आधुनिक एनालिटिकल एवं टेस्टिंग सुविधाएं, किट एवं तकनीक विकास इकाइयां, वेस्ट ट्रीटमेंट सिस्टम तथा को-वर्किंग एवं इनक्यूबेशन स्पेस उपलब्ध हैं। केंद्र का उद्देश्य ‘लैब से टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी से उद्यम’ की यात्रा को सहयोग देना है। एग्री-बायोटेक्नोलॉजी, बायोफर्टिलाइजर एवं बायोकंट्रोल एजेंट्स, हेल्थ एवं डायग्नोस्टिक्स, फूड बायोटेक्नोलॉजी, पर्यावरणीय जैव-प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को प्रयोगशाला सुविधाएं, प्रशिक्षण, मेंटरिंग, परीक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। यह केंद्र प्रदेश में बायोटेक्नोलॉजी आधारित अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप विकास एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत आधार के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से शोधार्थियों एवं नवाचारकर्ताओं को प्रोटोटाइप विकास, तकनीकी मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, मेटरशिप तथा उद्योग एवं निवेशकों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

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