Edited By Vandana Khosla, Updated: 22 May, 2026 12:16 PM

भोपालः मध्यप्रदेश में भाजपा आगामी चुनावों के लिए पार्टी संगठन को मजबूती करने में जुटी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। संगठन के मुताबिक, अब निगम-मंडल अध्यक्षों को मंत्री का दर्जा और प्रोटोकॉल नहीं मिलेगा। जमीनी स्तर...
भोपालः मध्यप्रदेश में भाजपा आगामी चुनावों के लिए पार्टी संगठन को मजबूती करने में जुटी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। संगठन के मुताबिक, अब निगम-मंडल अध्यक्षों को मंत्री का दर्जा और प्रोटोकॉल नहीं मिलेगा। जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और आंतरिक गुटबाजी पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
अब निगम-मंडल अध्यक्षों को मंत्री दर्जा और प्रोटोकॉल नहीं मिलेगा। बल्कि उन्हें उन विधानसभा सीटों की कमान संभालनी होगी, जहां पिछले चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिलने वाले पारंपरिक मंत्री पद के दर्जे और वीआईपी प्रोटोकॉल पर फिलहाल रोक रहेगी। अब जोर केवल काम और जिम्मेदारी पर होगा। सीएम मोहन यादव का भी कहना है कि अब प्रोटोकॉल नहीं, सिर्फ और सिर्फ ग्राउंड परफॉर्मेंस देखी जाएगी।
बीजेपी ने आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही जिम्मेदारियां बांटने का फैसला किया है, ताकि कमजोर सीटों पर समय रहते पार्टी को मजबूत किया जा सके। संगठन ने साफ कहा है कि अब पद सिर्फ नाम या आराम के लिए नहीं मिलेंगे, बल्कि उन लोगों को जिम्मेदारी दी जाएगी जो जमीन पर मेहनत करेंगे और अच्छे नतीजे लाएंगे।