Edited By Himansh sharma, Updated: 20 May, 2026 03:36 PM

रतलाम में भाजपा के वरिष्ठ नेता का अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ इस तरह खुलकर धरने पर बैठना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
रतलाम: भाजपा के लिए मध्य प्रदेश में बड़ा सियासी संकेत मानी जा रही घटना बुधवार को रतलाम में देखने को मिली, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री Himmat Kothari ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, बल्कि कार्रवाई नहीं होने पर पार्टी छोड़ने तक की चेतावनी दे डाली। अपने ही शासन में उपेक्षा से नाराज कोठारी का एसपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठना अब भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल मामला उनके करीबी मित्र और मीसाबंदी बसंत पुरोहित की जमीन पर कथित कब्जे से जुड़ा है। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी। पूर्व मंत्री ने बताया कि वे कुछ दिन पहले खुद एसपी अमित कुमार से मिले थे और पूरे मामले की जानकारी दी थी, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बुधवार दोपहर अचानक Himmat Kothari रतलाम एसपी कार्यालय पहुंचे और सीधे एसपी के चैंबर के बाहर जमीन पर बैठ गए। पूर्व गृह मंत्री को धरने पर बैठा देख पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसपी अमित कुमार बाहर आए और कोठारी से चर्चा कर उन्हें अंदर ले गए। इसके बाद संबंधित थाना प्रभारी को बुलाकर मामले की जानकारी ली गई और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मीडिया से बातचीत में कोठारी का गुस्सा खुलकर सामने आया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकारियों की मनमानी चरम पर है और अगर एक पूर्व मंत्री व जनप्रतिनिधि की सुनवाई नहीं हो रही, तो आम जनता की स्थिति समझी जा सकती है। उन्होंने साफ कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी भी छोड़ देंगे।
वहीं एसपी अमित कुमार ने कहा कि संबंधित पक्ष को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। हालांकि पूर्व मंत्री की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
रतलाम में भाजपा के वरिष्ठ नेता का अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ इस तरह खुलकर धरने पर बैठना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। पार्टी छोड़ने की चेतावनी ने भाजपा संगठन की चिंता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी असर डाल सकता है।