Edited By Himansh sharma, Updated: 07 May, 2026 08:42 PM

मांझी ने शिविर में मौजूद खाली कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए आयोजन पर भी सवाल उठाए।
गरियाबंद। जिले के अमलीपदर तहसील मुख्यालय में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर उस वक्त अचानक गरमा गया जब पूर्व भाजपा संसदीय सचिव और वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी मंच से ही प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलकर भड़क उठे। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके की मौजूदगी के बीच मांझी के तीखे तेवरों ने पूरे माहौल को कुछ देर के लिए राजनीतिक रंग दे दिया। गोवर्धन मांझी ने मंच से कहा कि क्षेत्र की जनता लगातार छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के पास पहुंच रही है, लेकिन अधिकारी समय पर फोन तक नहीं उठाते, जिससे काम अटक जाता है और लोग परेशान होते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोग लंबे समय से भटक रहे हैं, लेकिन समाधान की रफ्तार बेहद धीमी है। कलेक्टर की मौजूदगी में ही नाराजगी जताते हुए मांझी ने कहा, “कलेक्टर साहब, कम से कम फोन तो उठाया कीजिए। कई समस्याएं ऐसी होती हैं जिनका समाधान बातचीत से ही तुरंत हो सकता है, लेकिन यहां तो सुनवाई ही नहीं होती।” शिविर कोई जादू की छड़ी नहीं” - गोवर्धन मांझी अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा कि केवल शिविर लगाने से जमीनी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं। सुशासन तिहार कोई जादू की छड़ी नहीं है कि एक झटके में सारी दिक्कतें खत्म हो जाएं। सरकार की मंशा जरूर अच्छी है, लेकिन सिस्टम को जमीन पर और मजबूत करने की जरूरत है।
मांझी ने शिविर में मौजूद खाली कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए आयोजन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त प्रचार-प्रसार और गंभीर तैयारी के अभाव में जनता की भागीदारी कम दिख रही है, जो चिंता का विषय है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिविर का माहौल कुछ देर के लिए चर्चा और बहस में बदल गया। मामला अब क्षेत्र में राजनीतिक हलचल का विषय बना हुआ है।