MP Cabinet: एमपी के विकास के लिए 38 हजार 555 करोड़ रुपये स्वीकृत, जानें सीएम डॉ. मोहन के अहम फैसले

Edited By Vandana Khosla, Updated: 05 May, 2026 03:42 PM

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भोपालः मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 मई को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले किए। कैबिनेट ने प्रदेश के विकास और जन-कल्याण  के लिए 38 हजार 555 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान कीं। कैबिनेट ने व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य...

भोपालः मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 मई को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले किए। कैबिनेट ने प्रदेश के विकास और जन-कल्याण  के लिए 38 हजार 555 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान कीं। कैबिनेट ने व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का ऐतिहासिक निर्णय भी लिया है। यह निर्णय प्रदेश के बुनियादी ढांचे, कृषि आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से लिए गए हैं। बैठक में 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी 2026-2031 के लिए सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय आवासों के रखरखाव, उत्पादन को बढ़ावा देने, 'मिशन वात्सल्य' के संचालन, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

बता दें, कैबिनेट ने मध्यप्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए 2442 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दलहन फसलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन में से दलहन फसल को पृथक कर "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" 11 अक्टूबर 2025 को प्रारंभ किया गया है। भारत सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में नए मिशन "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी है। इस मिशन का उददेश्य दलहनी फसलों के उत्पादन वृद्धि एवं क्षेत्रफल का विस्तार करना, किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल उन्नत बीजों का उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाना, कटाई के बाद प्रसंस्करण, भंडारण एवं प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" क्रियान्वयन से प्रजनंक बीज, बीज उत्पादन, बीज वितरण, प्रदर्शन और ट्रेनिंग होगी। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई विकसित होने से कृषक लाभान्वित होगें। इससे दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उत्पादन में वृद्धि होगी।

सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रुपये की स्वीकृति
कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सड़क-सेतु के संधारण से संबंधित योजना को सोलहवें वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 150 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया है। इसी तरह एफ टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों के अनुरक्षण के लिए 1 हजार 345 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीण सड़कों, अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के लिए 24 हजार 300 करोड़ रुपये का अनुमोदन सहित सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों से जुड़ी योजना की सोलहवें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 की निरंतरता के लिए 610 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इलेक्ट्रॅानिक्स मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी कार्यों 1295 करोड़ 52 लाख रुपये की स्वीकृति
कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अंतर्गत इलेक्ट्रॅानिक्स मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य से संबंधित योजनाओं की निरंतरता और संचालन के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। स्वीकृति अनुसार आरसीबीसी, डीईजीएस और एनआईसी आदि केन्द्रों के आगामी पांच वर्षों 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालन के लिए 244 करोड़ 20 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। ई-दक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत राज्य के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। कैबिनेट ने 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए प्रदेश में इलेक्ट्रानिक्स मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना के लिए 225 करोड़ 32 लाख रुपये की स्वीकृति दी। इसके अंतर्गत भोपाल के बांदीखेड़ी में 209.47 एकड़ क्षेत्र में क्लस्टर की स्थापना की जाएगी। साथ ही, सूचना प्रौ‌द्योगिकी निवेश प्रोत्साहन संबंधी योजना की निरंतरता के लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा राज्य को आईटी एवं आईटीईएस सेवाओं के लिए आकर्षक गंत्वय के रूप में स्थापित करने के लिए पूंजीगत अनुदान कर संबंधी रियायतें, प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास तथा आईटी पार्क/ईएमसी की स्थापना को बढ़ावा दिए जाने संबंधी कार्य किया जायेगा। इसका संचालन एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जाता है। कैबिनेट ने प्रदेश में स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क की स्थापना और संचालन संबंधी योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 526 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इस योजना का उद्देश्य राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सभी शासकीय कार्यालयों को आपस में जोड़कर सुगम संचार एवं सूचना के आदान-प्रदान की सुविधा उपलब्ध कराना है।

आंगनवाड़ी केंद्रों और समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2412 करोड़ रुपये की स्वीकृति
कैबिनेट ने महिला एवं बाल विकास अंतर्गत नवीन, निर्माणाधीन अपूर्ण और अभी शुरू नहीं हुई आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण और समेकित बाल संरक्षण योजना के लिए लगभग 2412 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। स्वीकृति के अनुसार आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए भवन निर्माण अंतर्गत 1500 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण से सम्बंधित योजना की प्रदेश में 16वें वित्त आयोग की निर्धारित अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-2031 में क्रियान्वयन के लिए 1800 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इसी अवधि में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत कार्ययोजना समेकित बाल संरक्षण योजना मिशन वात्सल्य के संचालन के लिए 606 करोड़ 68 लाख और स्वच्छता एक्शन प्लान के संचालन के लिए 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। समेकित बाल संरक्षण योजना अंतर्गत किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 एवं नियम 2016 में प्रावधानित विधि विवादित एवं देखरेख तथा संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण, शिक्षा, आश्रय एवं संरक्षण प्रदान किया जाकर पारिवारिक पुनर्वास किया जाता है।

व्यापारियों के सर्वांगीण विकास के लिए अहम निर्णय
कैबिनेट ने राज्य के व्यापारिक समुदाय के हितों के संरक्षण, उनके सर्वांगीण विकास और समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए 'राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड' (STWB) और जिला स्तरीय समितियों (DLC) के गठन की मंजूरी दी है। भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उठाए गए इस कदम का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के व्यापारियों और सरकार के बीच एक सीधा संवाद तंत्र स्थापित करना है, जिससे व्यापारिक क्षेत्र की बाधाओं को दूर कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके। राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री सदस्य होंगे। प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करने के लिए वित्त, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, खनिज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ राज्य नीति आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, एनएचएआई और एफएसएसएआई जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुखों को भी बोर्ड का आधिकारिक सदस्य बनाया गया है।

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान और आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। बोर्ड में देश के प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठनों जैसे सीआईआई (CII), फिक्की (FICCI), डिक्की (DICCI), फिओ (FIEO) और लघु उद्योग भारती के राज्य प्रमुखों को पदेन सदस्य के रूप में जोड़ा गया है। क्षेत्रीय प्राधिकरण डीजीएफटी को सदस्य एवं मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलप्मेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है। राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड में आवश्यकतानुसार संशोधन अध्यक्ष की अनुमति से किया जा सकेगा। जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) के गठन एवं कार्य क्षेत्र का निर्धारण सदस्य सचिव द्वारा किया जाएगा। राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड की बैठक कैलेंडर वर्ष में चार बार अर्थात् प्रत्येक तीन माह में एक बार तथा जिला स्तरीय समिति की बैठक प्रत्येक माह में एक बार आयोजित की जाएगी।



 

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