MP में जल्द बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार! चुनावी नतीजों के बाद सियासत गरम, कई मंत्रियों पर गिर सकती है गाज

Edited By Himansh sharma, Updated: 06 May, 2026 12:24 PM

political buzz grows in mp after poll results

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अब अपने कार्यकाल के मध्य चरण में प्रवेश कर चुकी है।

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने न केवल राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय की है, बल्कि उसका असर अब राज्यों की आंतरिक सियासत पर भी साफ दिखने लगा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल हो सकता है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अब अपने कार्यकाल के मध्य चरण में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे समय में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भाजपा की प्राथमिकता बन गया है। पिछले कुछ महीनों में मंत्रियों के बयानों और सार्वजनिक मंचों पर दिखी असहजता ने संगठन को सोचने पर मजबूर किया है। यही वजह है कि मंत्रियों के प्रदर्शन का विस्तृत आकलन कराया गया, जिसकी रिपोर्ट अब पार्टी नेतृत्व के पास बताई जा रही है।

सूत्रों की मानें तो यह फेरबदल केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि परफॉर्मेंस और संगठनात्मक समन्वय के आधार पर ठोस निर्णय लिए जा सकते हैं। ऐसे में कुछ नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है, तो वहीं कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या छुट्टी भी संभव मानी जा रही है।

संख्या के लिहाज से देखें तो फिलहाल मंत्रिमंडल में 31 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक सीमा 35 की है। यानी चार पद अभी खाली हैं, जिन्हें भरा जा सकता है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल विस्तार होगा या बड़े स्तर पर फेरबदल भी देखने को मिलेगा। राजनीतिक गलियारों में गुजरात मॉडल की भी चर्चा है, जहां पूरी कैबिनेट बदल दी गई थी। लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसा होने की संभावना फिलहाल कम नजर आती है। पार्टी ने हाल ही में उत्तराखंड में सीमित विस्तार का रास्ता अपनाया, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ नए चेहरों को शामिल कर संतुलन साधने की कोशिश की।

मध्य प्रदेश के संदर्भ में यह फेरबदल इसलिए भी अहम है क्योंकि आने वाले ढाई साल चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा किसी भी तरह की आंतरिक असंतुष्टि या समन्वय की कमी को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं दिख रही। स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। अब निगाहें पार्टी हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि सत्ता और संगठन के बीच संतुलन कैसे साधा जाए।

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