पूर्व CM बोले- जनता से अपील कर PM विदेश निकल गए, नियमों की धज्जियां खुद उड़ा रही सरकार

Edited By Himansh sharma, Updated: 17 May, 2026 07:57 PM

bhupesh attacks govt over double standards

देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, ईंधन खर्च और सरकारी फिजूलखर्ची पर अब राजनीति भी गरमा गई है।

रायपुर: देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों, ईंधन खर्च और सरकारी फिजूलखर्ची पर अब राजनीति भी गरमा गई है। एक ओर केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की बचत को लेकर जनता से जिम्मेदारी निभाने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे “दोहरे मापदंड” की राजनीति बता रहा है। इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है।

भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार जनता को पेट्रोल बचाने की सीख दे रही है, लेकिन खुद सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग उसी गंभीरता का पालन करते नजर नहीं आते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “पर उपदेश कुशल बहुतेरे” भाजपा की कार्यशैली बन चुकी है। उनका आरोप था कि जनता से मितव्ययिता की अपेक्षा की जा रही है, जबकि सत्ता प्रतिष्ठान में दिखावे और यात्राओं पर खर्च लगातार जारी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही आम आदमी की कमर तोड़ चुकी हैं और अब बचत के नाम पर जनता पर नैतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में ईंधन बचत राष्ट्रीय प्राथमिकता है, तो इसकी शुरुआत सरकार और उसके उच्च पदों से क्यों नहीं होती?

इधर, छत्तीसगढ़ सरकार ने खर्चों में कटौती को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों में सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग, काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम करने, वाहन पूलिंग सिस्टम लागू करने और विदेश यात्राओं पर नियंत्रण जैसे फैसले शामिल हैं। अब सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही संभव होंगी।

सरकार ने दफ्तरों में ई-ऑफिस व्यवस्था को बढ़ावा देने और ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रणाली “IGOT कर्मयोगी पोर्टल” के उपयोग पर भी जोर दिया है। तर्क यह दिया जा रहा है कि सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग, ईंधन की बचत और वित्तीय अनुशासन समय की जरूरत बन चुके हैं।

हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मुद्दे को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि “जनता के सामने सादगी बनाम सत्ता के आचरण” की बहस के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन सकता है।

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