Edited By Himansh sharma, Updated: 16 May, 2026 06:06 PM

मध्यप्रदेश भाजपा में अब ‘काफिला कल्चर’ पर सियासी ब्रेक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।
भोपाल: मध्यप्रदेश भाजपा में अब ‘काफिला कल्चर’ पर सियासी ब्रेक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सादगी, ईंधन बचत और अनावश्यक वाहन रैलियों से बचने की अपील को हल्के में लेने वाले नेताओं पर संगठन ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रदेशभर में स्वागत और शक्ति प्रदर्शन के नाम पर निकाले गए लंबे-लंबे वाहन काफिलों ने अब दिल्ली तक हलचल पैदा कर दी है। भाजपा हाईकमान ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब कर ली है, वहीं प्रदेश संगठन ने संबंधित नेताओं को 17 मई को भोपाल बुलाकर जवाब-तलब करने का फैसला किया है।
दरअसल, 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से नेताओं और कार्यकर्ताओं को संदेश दिया था कि वे अनावश्यक वाहन रैलियों और ईंधन की बर्बादी से बचें। लेकिन इसके बावजूद मध्यप्रदेश के कई जिलों में नेताओं के स्वागत में दर्जनों से लेकर सैकड़ों गाड़ियों के काफिले निकलते रहे। कहीं लग्जरी कारों की कतारें दिखीं तो कहीं बाइक रैलियों से सड़कें जाम हो गईं। इससे पार्टी की छवि और प्रधानमंत्री की अपील - दोनों पर सवाल उठने लगे।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 8 से 9 स्थानों पर बड़े वाहन काफिलों के साथ शक्ति प्रदर्शन हुआ, जिसने संगठन को असहज कर दिया। मामला तब और गंभीर हो गया जब इन आयोजनों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इसके बाद दिल्ली नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और पूछा कि पीएम की अपील के बाद भी ऐसी रैलियां क्यों हुईं।
भोपाल में होने वाली बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी और पार्टी के जिम्मेदार नेता मौजूद रहेंगे। संबंधित नेताओं से साफ पूछा जाएगा कि आखिर किस परिस्थिति में इतने बड़े वाहन काफिले निकाले गए। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि अनुशासन और प्रधानमंत्री की सार्वजनिक अपील केवल कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि पदाधिकारियों और नेताओं पर भी समान रूप से लागू होती है।
जिन नेताओं की रैलियों पर सवाल उठे हैं, उनमें देवास जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष टिकेंद्र प्रताप सिंह का नाम प्रमुख है, जो करीब 200 वाहनों के काफिले के साथ जिला कार्यालय पहुंचे थे। ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार चंबल दौरे पर 24 गाड़ियों के साथ निकले। सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल खुद ई-रिक्शा में जरूर बैठे, लेकिन उनके पीछे 30 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला चलता रहा।
इसी तरह महिला आयोग अध्यक्ष रेखा यादव के छतरपुर दौरे में सैकड़ों लग्जरी गाड़ियों की मौजूदगी से शहर में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। लघु उद्योग निगम अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह और खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन ने भले ही ई-रिक्शा से यात्रा की, लेकिन समर्थकों के भारी वाहन काफिले ने पूरी सादगी की तस्वीर को फीका कर दिया।
भाजपा संगठन अब इस पूरे मामले को केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक सोच और संदेश की अवहेलना के रूप में देख रहा है। यही वजह है कि इस बार कार्रवाई केवल मौखिक नाराजगी तक सीमित नहीं रहने वाली। पार्टी अंदरखाने यह साफ संकेत देना चाहती है कि आने वाले समय में शक्ति प्रदर्शन की राजनीति से ज्यादा महत्व अनुशासन और जनसंवेदनशीलता को दिया जाएगा।