Edited By Himansh sharma, Updated: 07 May, 2026 01:32 PM

मध्य प्रदेश के भोपाल की सड़कों पर करीब 500 गाड़ियों का लंबा काफिला… जगह-जगह स्वागत… समर्थकों का उत्साह और सत्ता के गलियारों तक गूंजता एक नाम केपी यादव।
भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल की सड़कों पर करीब 500 गाड़ियों का लंबा काफिला… जगह-जगह स्वागत… समर्थकों का उत्साह और सत्ता के गलियारों तक गूंजता एक नाम केपी यादव। राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का पदभार ग्रहण करने पहुंचे गुना के पूर्व सांसद केपी यादव ने महज औपचारिक जिम्मेदारी नहीं संभाली, बल्कि अपनी राजनीतिक मौजूदगी का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि केपी यादव ने पदभार ग्रहण किया सवाल यह है कि आखिर यह शक्ति प्रदर्शन किसके लिए था?
वही केपी यादव, जो कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाते थे। तस्वीरों में उनके साथ सेल्फी लेते नजर आते थे। लेकिन राजनीति ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्होंने चुनावी मैदान में सिंधिया को ही शिकस्त दे दी। इसके बाद उनका टिकट कटा, राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठे, और माना जाने लगा कि शायद उनकी चमक फीकी पड़ गई है। लेकिन राजनीति में वापसी अक्सर खामोशी से नहीं होती… और केपी यादव ने यह वापसी शोर के साथ की है।
भोपाल पहुंचने तक उनका काफिला सिर्फ समर्थकों की भीड़ नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी था। भाजपा कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री निवास तक उनकी सक्रिय मौजूदगी ने साफ कर दिया कि वे अब खुद को सिर्फ “पूर्व सांसद” तक सीमित नहीं रखना चाहते।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह शक्ति प्रदर्शन आने वाले समय की बड़ी महत्वाकांक्षाओं का ट्रेलर हो सकता है। क्योंकि सत्ता की राजनीति में पद से ज्यादा मायने उस ताकत के होते हैं, जो सड़क पर दिखाई दे। फिलहाल, भाजपा खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है, लेकिन इतना जरूर है कि केपी यादव ने अपने अंदाज में यह एहसास करा दिया है कि वे अभी राजनीतिक दौड़ से बाहर नहीं हुए हैं। और राजनीति मे इशारे वही समझते हैं, जो सत्ता की भाषा पढ़ना जानते हैं।