Edited By meena, Updated: 30 Apr, 2026 12:03 PM

CM Mohan Yadav ने “कंट्रोल” और “कन्फिडेंस” का संकेत दिया और विपक्ष की रणनीति momentum नहीं पकड़ पाई। राजनीतिक जानकारों का तो यह भी कहना है, कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संगठन स्तर पर BJP के लिए morale booster और कांग्रेस के लिए रणनीति पर...
भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा में वोटिंग को लेकर हुआ टकराव भले तीन दिन पुराना हो, लेकिन मुख्यमंत्री Mohan Yadav का सख्त संदेश अब भी सियासी गलियारों में गूंज रहा है। इसे लेकर जहां सत्ता पक्ष का जोश हाई है, तो विपक्ष पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रहा है।
“हम डरने वाले नहीं हैं… कोई डराएगा तो निपटने के लिए तैयार हैं” — CM का यह बयान अब सिर्फ सदन की बहस नहीं, बल्कि राजनीतिक मैसेज बन चुका है।सूत्रों के मुताबिक, सत्ता पक्ष इसे “फर्म लीडरशिप सिग्नल” के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहा है—जहां साफ संकेत दिया गया कि सरकार दबाव की राजनीति में नहीं आने वाली। इसके साथ ही डॉ. यादव के इस रूख ने कहीं ना कहीं उन सुगबुगाहटों को भी शून्य साबित कर दिया है, जिनमें विरोधी गाहे बगाहे उन्हें अकेला और कमजोर साबित करने की कोशिश करते थे।
दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar की ओर से उठाई गई डिवीजन वोटिंग की मांग अब भी चर्चा में है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर आक्रामक बढ़त नहीं बना पाई है।
क्यों अब भी चर्चा में है ये बयान?
* CM का बयान “strong leadership narrative” बना रहा
* सत्ता पक्ष इसे ground cadre तक amplify कर रहा
* विपक्ष का वॉकआउट उल्टा उसी पर भारी पड़ता दिख रहा
सियासी मैसेज क्या गया?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में
CM Mohan Yadav ने “कंट्रोल” और “कन्फिडेंस” का संकेत दिया और विपक्ष की रणनीति momentum नहीं पकड़ पाई। राजनीतिक जानकारों का तो यह भी कहना है, कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संगठन स्तर पर BJP के लिए morale booster और कांग्रेस के लिए रणनीति पर पुनर्विचार का कारण बन सकता है।