BJP को बड़ा झटका! सिंधिया समर्थक की कांग्रेस में वापसी के बढ़े कदम और नेताओं के भी पलटी मारने के संकेत

Edited By Himansh sharma, Updated: 15 May, 2026 12:22 PM

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मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है।

ग्वालियर। (अंकुर जैन): मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर में भारतीय जनता पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगने की संभावना जताई जा रही है, जब सिंधिया समर्थक एवं पूर्व पार्षद देवेंद्र पाठक के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के मुताबिक, वे आज कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं, हालांकि इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

देवेंद्र पाठक पहले ही भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं, जिसके बाद से ग्वालियर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके इस कदम को पार्टी के भीतर असंतोष और लंबे समय से चल रहे आंतरिक मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूर्व विधायक पर गंभीर आरोप

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में देवेंद्र पाठक ने एक पूर्व विधायक पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता और गरीबों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के बावजूद उनकी बातों को अनदेखा किया गया और जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा होती रही। पाठक ने आरोप लगाया कि संगठनात्मक स्तर पर कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

सिंधिया के साथ निष्ठा” वाला बयान बना चर्चा का विषय

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा देवेंद्र पाठक के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “पार्टी छोड़ सकता हूं, लेकिन सिंधिया जी का साथ नहीं छोड़ूंगा।” इस कथन ने राजनीतिक हलकों में नए सियासी संकेतों को जन्म दिया है और इसे सिंधिया समर्थक खेमे की अंदरूनी स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

2020 के बाद बनी राजनीतिक स्थिति पर फिर सवाल

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में कांग्रेस छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए नेताओं और कार्यकर्ताओं को भाजपा में समायोजित करने को लेकर पहले से ही चर्चाएं होती रही हैं। शुरुआती दौर में कई नेताओं को संगठन और सत्ता में जिम्मेदारियां मिलीं, लेकिन समय के साथ कुछ कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना भी सामने आई है।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह असंतोष अपेक्षाकृत अधिक देखा जा रहा है, जहां सिंधिया समर्थकों का मजबूत प्रभाव माना जाता है। ऐसे में देवेंद्र पाठक का संभावित कदम भाजपा संगठन के लिए स्थानीय स्तर पर एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक हलचल जारी

फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं। देवेंद्र पाठक के कांग्रेस में औपचारिक प्रवेश की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस सियासी बदलाव की तस्वीर और साफ हो सकेगी।

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