दतिया उपचुनाव का बिगुल बजा! दिग्गज नरोत्तम के सामने कांग्रेस उतारेगी मजबूत प्रत्याशी, इन दो नेताओं के नाम आए सामने

Edited By Himansh sharma, Updated: 28 May, 2026 02:33 PM

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मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार करता दिखाई दे रहा है।

दतिया: मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार करता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा एक बार फिर सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए 14 जुलाई की तारीख तय कर दी गई है। इसके साथ ही यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि निर्वाचन आयोग जल्द ही उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। दरअसल, आपराधिक मामले में सजा होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने दो अप्रैल को राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करते हुए सीट को रिक्त घोषित कर दिया था। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार छह माह के भीतर उपचुनाव कराना आवश्यक है, यानी दो अक्टूबर से पहले दतिया को नया विधायक मिलना तय माना जा रहा है। चूंकि मानसून के दौरान चुनाव कराना आयोग सामान्यतः टालता है, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि जून में ही चुनावी कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है।

उधर, प्रशासनिक स्तर पर भी चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश पर दतिया जिले के सभी 291 मतदान केंद्रों के लिए ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग 19 मई से शुरू कर दी गई है। लगभग 600 ईवीएम और 600 वीवीपैट मशीनों की तकनीकी जांच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियरों की निगरानी में की जा रही है।दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निष्पक्ष चुनाव को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं। वेबकास्टिंग, स्ट्रांग रूम सुरक्षा और मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर आयोग इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरतता दिखाई दे रहा है।

भाजपा की नजर नरोत्तम मिश्रा पर

दतिया उपचुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी की संभावित रणनीति को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि भाजपा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर दांव खेल सकती है। 2023 विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार के बाद भी मिश्रा लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय बने हुए हैं और संगठन के भीतर उनकी पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है।भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी उन्हें फिर से विधानसभा में भेजकर प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका देने की तैयारी कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो दतिया उपचुनाव केवल स्थानीय मुकाबला नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश स्तर की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन जाएगा।

कांग्रेस में टिकट को लेकर मंथन तेज

वहीं कांग्रेस भी इस सीट को किसी भी कीमत पर बचाए रखना चाहती है। पार्टी के भीतर अवधेश नायक और राजेंद्र भारती के बेटे अंकित अथवा अर्जुन भारती के नामों पर गंभीर चर्चा चल रही है। कानूनी कारणों से राजेंद्र भारती के खुद चुनाव लड़ने की संभावना कमजोर मानी जा रही है, ऐसे में कांग्रेस नए चेहरे के जरिए सहानुभूति और संगठनात्मक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

हाल ही में राजेंद्र भारती ने अपने बेटे के साथ दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद दतिया की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस भारती परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए युवा चेहरे को मैदान में उतार सकती है।

दूसरी ओर, यदि पार्टी अवधेश नायक को टिकट देती है तो उसका लक्ष्य भाजपा के पारंपरिक ब्राह्मण और संघ समर्थित वोट बैंक में सेंध लगाना हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस जातीय और सहानुभूति दोनों समीकरणों को साधने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

दतिया बनेगा प्रतिष्ठा का रण

दतिया उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। भाजपा के लिए यह नरोत्तम मिश्रा की वापसी का मंच बन सकता है, तो कांग्रेस के लिए अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की परीक्षा होगी। प्रशासनिक तैयारियों और राजनीतिक हलचलों को देखकर साफ है कि आने वाले दिनों में दतिया प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक रणभूमि बनने जा रहा है।

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