Edited By Himansh sharma, Updated: 29 May, 2026 06:57 PM

भाजपा में महापौर और विधायक के बीच चल रही खींचतान अब संगठन के दरवाजे तक पहुंच गई है।
खंडवा: भाजपा में महापौर और विधायक के बीच चल रही खींचतान अब संगठन के दरवाजे तक पहुंच गई है। नगर निगम के कामों की समीक्षा और आपसी समन्वय को लेकर उठे विवाद के बीच शुक्रवार को भाजपा के निमाड़ संगठन प्रभारी सुरेंद्र शर्मा ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर साफ संदेश दिया कि पार्टी में व्यक्तिगत मतभेद संगठन से ऊपर नहीं हो सकते।
बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि भाजपा एक परिवार है और परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं। उन्होंने स्वीकार किया कि विधायक और महापौर के बीच के विवाद की शिकायतें संगठन तक पहुंची हैं और पूरे मामले की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाएगी।
हालांकि, उन्होंने फिलहाल दोनों पक्षों को सही ठहराते हुए कहा कि विधायक को अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी लेने और समीक्षा करने का पूरा अधिकार है। वहीं महापौर भी अपने कार्यों के आधार पर जनता और संगठन के प्रति जवाबदेह हैं। संगठन उनके कामकाज के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही मूल्यांकन करता है।
इस दौरान महापौर की जेठानी चारूलता यादव को सांसद प्रतिनिधि बनाए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठे। इस पर संगठन प्रभारी ने कहा कि चारूलता यादव पार्टी की सक्रिय पदाधिकारी हैं और प्रदेश संगठन से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को प्रतिनिधि नियुक्त करना सांसद का विशेषाधिकार होता है और इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उधर भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान विधायक कंचन तनवे का कुछ देर बाद कार्यक्रम छोड़कर जाना भी चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि बाद में सामने आया कि वह पहले से निर्धारित जनपद पंचायत खंडवा की समीक्षा बैठक में शामिल होने पहुंची थीं। बताया गया कि समीक्षा बैठक का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था, जबकि पार्टी का कार्यक्रम बाद में तय हुआ था।
खंडवा भाजपा में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मियों के बीच संगठन की यह पहल अब दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल विवाद को सार्वजनिक टकराव की बजाय ‘मतभेद’ की सीमा में रखने की रणनीति पर काम करता नजर आ रहा है।