Edited By Himansh sharma, Updated: 23 May, 2026 02:31 PM

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही बयानबाजी के बीच अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है,
रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही बयानबाजी के बीच अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बीच फोन पर हुई बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस के भीतर दिख रही खींचतान सिर्फ राजनीतिक संदेश थी या फिर अंदरूनी समीकरणों की एक परत।
वीडियो में सिंहदेव का अंदाज हल्का और सहज दिखाई देता है। बातचीत के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि राजनीति में ऐसी बातें चलती रहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मीडिया के सामने दीपक बैज के लिए शुभकामनाएं दी हैं और मेहनत कर आगे बढ़ने की बात कही। सिंहदेव के शब्दों में राजनीतिक संकेत भी दिखे और सहजता भी -“अपना काम करते रहना है, कल क्या होगा किसे पता, मजा लेते रहना चाहिए। हालांकि इस बातचीत ने माहौल को नरम जरूर किया, लेकिन कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और भूमिका को लेकर उठे सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं।
दरअसल विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई थी जिसमें सिंहदेव ने कहा था कि यदि पार्टी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देती है तो वे इसके लिए तैयार हैं। इसके जवाब में दीपक बैज ने कहा था कि बड़े नेताओं को दिल्ली में जाकर पार्टी को मजबूत करना चाहिए और प्रदेश में युवाओं को अवसर मिलना चाहिए।
इस पर सिंहदेव ने भी जवाबी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे खुद को आज भी पूरी तरह सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करते हैं तथा छत्तीसगढ़ में रहकर काम करना चाहते हैं। उन्होंने संगठन की मजबूती को हर कांग्रेसी की पहली जिम्मेदारी बताया। साथ ही संकेतों में यह भी कहा कि राजनीति में केवल उम्र नहीं, बल्कि जनाधार और चुनावी प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण होता है।
इसी बीच राज्य सरकार में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की अंदरूनी लड़ाई अब सार्वजनिक होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समय-समय पर सिंहदेव जैसे नेताओं का उपयोग करती रही है और अब मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले समय में कांग्रेस संगठन इस बहस को नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तक जाने देती है या फिर इसे केवल बयानबाजी का एक दौर मानकर आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना साफ है कि फोन पर आई यह मुस्कुराहट राजनीतिक संदेशों से खाली नहीं है।