Edited By Himansh sharma, Updated: 29 May, 2026 05:26 PM

मध्यप्रदेश भाजपा में नई प्रदेश कार्यसमिति के गठन को लेकर पिछले दो महीनों से सियासी खींचतान जारी है।
भोपाल: मध्यप्रदेश भाजपा में नई प्रदेश कार्यसमिति के गठन को लेकर पिछले दो महीनों से सियासी खींचतान जारी है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल कई बार संकेत दे चुके हैं कि नई टीम जल्द घोषित होगी, लेकिन अब तक सूची जारी नहीं हो सकी। संगठन के भीतर इसकी सबसे बड़ी वजह नियम बनाम निष्ठा की लड़ाई मानी जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थकों की लंबी सूची पार्टी नेतृत्व को सौंपी है। इनमें कई ऐसे नेता शामिल बताए जा रहे हैं जो पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं या टिकट से वंचित रह गए थे। सूत्रों के मुताबिक, सिंधिया खेमे की कोशिश है कि इन नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में बड़ी हिस्सेदारी मिले, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व इस बार पुराने फार्मूले को दोहराने के मूड में नहीं दिख रहा।
भाजपा हाईकमान का साफ संदेश है कि 2020 में कांग्रेस से आए नेताओं और उनके समर्थकों को विशेष परिस्थितियों में संगठन में समायोजित किया गया था। उस समय सरकार बचाने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की मजबूरी थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। पार्टी संगठन अब स्पेशल ट्रीटमेंट के बजाय तय गाइडलाइन के आधार पर ही नियुक्तियां चाहता है।
इसी खींचतान के कारण हेमंत खंडेलवाल की टीम लगातार अटकती जा रही है। अप्रैल में भोपाल में आयोजित प्रशिक्षण महाअभियान की बैठक में उन्होंने मंच से दावा किया था कि मई के भीतर कार्यसमिति घोषित कर दी जाएगी और ओरछा में उसकी पहली बैठक भी होगी। इसके बाद मीडिया के सामने भी जल्द सूची जारी होने की बात कही गई, लेकिन समय बीतने के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो सकी।
भाजपा संगठन के भीतर यह भी चर्चा तेज है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल में बनी 403 सदस्यीय जंबो कार्यसमिति अब पार्टी के लिए उदाहरण बन गई है, जिसे कई नेता राजनीतिक समझौते का मॉडल मानते हैं। उस समिति में बड़ी संख्या में विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल किए गए थे ताकि सिंधिया समर्थकों को संगठन में जगह दी जा सके।
सूत्र बताते हैं कि गतिरोध खत्म करने के लिए हेमंत खंडेलवाल हाल ही में दिल्ली में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से भी मुलाकात कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि संतोष ने स्पष्ट शब्दों में संगठनात्मक गाइडलाइन का अक्षरशः पालन करने की सलाह दी है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा नेतृत्व निष्ठा को प्राथमिकता देता है या फिर नियमों के आधार पर नई टीम तैयार होती है। फिलहाल, प्रदेश भाजपा की बहुप्रतीक्षित कार्यसमिति दिल्ली की हरी झंडी का इंतजार कर रही है।