Edited By Himansh sharma, Updated: 20 May, 2026 03:14 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी अचानक रतलाम एसपी कार्यालय पहुंच गए
रतलाम: मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी अचानक रतलाम एसपी कार्यालय पहुंच गए और एसपी के चेंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। अपने ही शासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कोठारी ने साफ शब्दों में कहा कि जब जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही, तो आम जनता की हालत का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
दरअसल मामला उनके बचपन के साथी और मीसाबंदी बसंत पुरोहित की जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया, जिसकी शिकायत लगातार पुलिस अधिकारियों से की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व मंत्री ने बताया कि वे कुछ दिन पहले स्वयं एसपी अमित कुमार से मिले थे और पूरे मामले से अवगत कराया था, बावजूद इसके पुलिस स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बुधवार दोपहर जैसे ही हिम्मत कोठारी एसपी ऑफिस पहुंचे, वे सीधे एसपी के चैंबर के बाहर जमीन पर बैठ गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसपी अमित कुमार तत्काल बाहर आए और पूर्व मंत्री से चर्चा कर उन्हें अंदर ले गए। इसके बाद डीडी नगर थाना प्रभारी को बुलाकर पूरे प्रकरण की जानकारी ली गई और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मीडिया से चर्चा करते हुए हिम्मत कोठारी का दर्द साफ झलकता दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकारियों की मनमानी बढ़ती जा रही है और अराजकता का माहौल बन चुका है। अगर एक पूर्व मंत्री और जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी भी छोड़ देंगे।
वहीं एसपी अमित कुमार ने कहा कि मामले में संबंधित पक्ष को बुलाया गया था, लेकिन वे दस्तावेज लेकर उपस्थित नहीं हुए। पूर्व मंत्री की शिकायत गंभीरता से सुनी गई है और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी करने की बात भी कही गई है।
रतलाम में पूर्व गृह मंत्री का इस तरह पुलिस प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। भाजपा संगठन और प्रशासन दोनों के लिए यह मामला आने वाले दिनों में असहज स्थिति पैदा कर सकता है।