Edited By Himansh sharma, Updated: 24 Apr, 2026 02:57 PM

जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सक्ती। जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस दर्दनाक घटना की जांच को लेकर जहां पहले स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही थी, वहीं अब जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ गए हैं। क्षेत्रीय सांसद कमलेश जांगड़े ने मामले की धीमी जांच पर नाराजगी जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सांसद ने इस गंभीर हादसे को लेकर सीधे केंद्र सरकार के तीन बड़े मंत्रियों को पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री को भेजे गए पत्र में पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
हादसे में भारी जानमाल का नुकसान
अपने पत्र में सांसद ने उल्लेख किया है कि 14 अप्रैल को वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर विस्फोट में अब तक 25 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे के वक्त करीब 50 श्रमिक मौके पर मौजूद थे, जिनमें कई इसकी चपेट में आ गए।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
कमलेश जांगड़े ने इस घटना को उद्योगों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि यह हादसा श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। साथ ही जिले के अन्य उद्योगों की भी सुरक्षा जांच कराई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और श्रमिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
राहत और मुआवजे का ऐलान
घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकार के साथ-साथ प्लांट प्रबंधन की ओर से मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। फिलहाल घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है और प्रशासन राहत कार्यों में जुटा हुआ है। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर बहस का विषय बन चुका है, जहां जांच की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।