BJP विधायक को बंगला खाली करने का नोटिस, MLA ने अपने ही CM को लेकर कह दी बड़ी बात, सियासत गरमाई

Edited By Himansh sharma, Updated: 23 Apr, 2026 08:09 PM

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: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आवासों पर अवैध कब्जे को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है

उज्जैन: (विशाल सिंह ठाकुर): मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आवासों पर अवैध कब्जे को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय सहित कुल 6 लोगों को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया है। इसके बाद मामला राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय की हाल ही में हुई कार्यपरिषद बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जिन लोगों का विश्वविद्यालय से कोई सीधा संबंध नहीं है, उनसे आवास वापस लिए जाएंगे। इसी निर्णय के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 6 आवासों पर ऐसे लोग रह रहे हैं जो या तो पूर्व कर्मचारी हैं या बाहरी श्रेणी में आते हैं। इनमें एक विधायक, पूर्व पुलिस अधिकारी, असिस्टेंट प्रोफेसर और अन्य लोग शामिल हैं।प्रशासन का कहना है कि कई वर्षों से इन आवासों पर कब्जा बना हुआ है, जबकि विश्वविद्यालय के कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं या फिर आवास के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं। इस समय 50 से अधिक कर्मचारी आवास आवंटन का इंतजार कर रहे हैं।

विधायक का पक्ष और आरोप

नोटिस जारी होने के बाद विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय ने प्रतिक्रिया देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आवास से संबंधित उनका हिसाब-किताब लंबित है और उन्होंने पहले ही चुनाव से पहले करीब 9 से 10 लाख रुपए की राशि जमा कर दी थी।

विधायक ने यह भी कहा कि 2010 में उनका प्रमोशन प्रस्ताव लंबित रहा, जिसके कारण भुगतान का समायोजन बाकी है। उन्होंने दावा किया कि कई बार विश्वविद्यालय से हिसाब करने का अनुरोध किया गया है। उनका कहना है कि जब पूरा हिसाब स्पष्ट हो जाएगा, तब वे आवास खाली कर देंगे।

इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री आवास को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं कुलपति बंगले का उपयोग कर रहे हैं, तो इस मुद्दे को उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख सख्त

कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने स्पष्ट किया है कि कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार विश्वविद्यालय के सभी आवास केवल नियमित कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रहेंगे। जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उन्हें एक महीने का समय दिया गया है।

प्रशासन का कहना है कि कई कर्मचारी खराब और जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कई आवासों पर लंबे समय से कब्जा है। इन्हें खाली कराकर जरूरतमंद कर्मचारियों को आवंटित किया जाएगा। इसके साथ ही 21 जर्जर भवनों को हटाने की भी योजना बनाई जा रही है।

राजनीतिक तकरार की संभावना

इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विधायक की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला आगे और तूल पकड़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि तय समय सीमा में आवास खाली होते हैं या नहीं।

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