पुत्र मोह में भाजपा विधायक ने SDOP को दी खुली चुनौती, बोले- करेरा तुम्हारे बाप का नहीं! हमारा इतिहास देख लेना

Edited By Himansh sharma, Updated: 20 Apr, 2026 11:13 AM

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा।

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में विधायक करेरा एसडीओपी आयुष जाखड़ को खुले मंच से चुनौती देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा - “करेरा तुम्हारे बाप का नहीं है… मेरा बेटा दिनेश करेरा भी जाएगा और वहीं से चुनाव भी लड़ेगा।

दरअसल पूरा मामला विधायक के छोटे बेटे दिनेश लोधी से जुड़ा है। 16 अप्रैल को दिनेश लोधी अपनी थार गाड़ी चला रहे थे, तभी कथित रूप से वाहन ने 5 लोगों को टक्कर मार दी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।

घटना सामने आने के बाद विधायक प्रीतम लोधी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा था कि उनके लिए परिवार से पहले जनता सर्वोपरि है और यदि बेटा दोषी है तो कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन दो दिन बाद जब दिनेश की करेरा एसडीओपी कार्यालय में पेशी हुई, तो मामला नया मोड़ ले गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पेशी के दौरान एसडीओपी आयुष जाखड़ ने दिनेश लोधी को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि अब करेरा में दिखाई मत देना। बताया जा रहा है कि इसी बात से विधायक प्रीतम लोधी नाराज हो गए।

इसके बाद वायरल वीडियो में विधायक का अलग ही तेवर देखने को मिला। उन्होंने पुलिस अधिकारी को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि करेरा किसी के बाप की जागीर नहीं है। उनका बेटा न सिर्फ करेरा जाएगा, बल्कि वहीं से चुनाव भी लड़ेगा। विधायक ने यह भी कहा कि उनके बेटे से एक मामूली एक्सीडेंट हुआ था, लेकिन उसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है और राजनीतिक रूप से उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। विधायक की “मेरा बेटा चुनाव लड़ेगा” वाली लाइन ने क्षेत्र के कई स्थानीय नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में सियासत और प्रशासन के बीच टकराव और बढ़ता है।

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