Edited By Himansh sharma, Updated: 24 Oct, 2026 10:16 AM
छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही अटकलों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का बिलासपुर दौरा राजनीतिक और संगठनात्मक नजरिए से चर्चा में आ गया है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही अटकलों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का बिलासपुर दौरा राजनीतिक और संगठनात्मक नजरिए से चर्चा में आ गया है। संघ की बैठकों के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की उनसे मुलाकात ने प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक ढांचे के विस्तार और प्रांत के संभावित विभाजन को लेकर भी अहम मंथन हुआ है। डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कोनी स्थित सरस्वती शिक्षा ज्ञान संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में स्वयंसेवकों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने संगठन के कार्यों के प्रति सजग रहने और जिम्मेदारी के साथ काम करने पर जोर दिया। उनके दौरे के दूसरे दिन संघ के प्रांत पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ में RSS के विस्तार की तैयारी, राष्ट्रीय बैठक में होगा फैसला
संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फिलहाल छत्तीसगढ़ में प्रांत स्तर पर संगठन की जिम्मेदारी एक ही प्रमुख के पास है। प्रदेश में गतिविधियों का दायरा बढ़ाने और संगठनात्मक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रांत के पुनर्गठन की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
शुक्रवार को हुई बैठक में इस विषय पर शुरुआती चर्चा हुई। रायपुर और बिलासपुर को अलग-अलग विभाग के रूप में विकसित करने को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई है। हालांकि, छत्तीसगढ़ प्रांत को औपचारिक रूप से दो हिस्सों में बांटने का अंतिम निर्णय अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली आगामी बैठक में विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया जाएगा।
संघ के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव होने पर प्रदेश में उसकी गतिविधियों के संचालन और जिम्मेदारियों के बंटवारे में परिवर्तन हो सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम आधिकारिक निर्णय सामने आना बाकी है।
बंद कमरे में कर्मवीर सिंह की भागवत से मुलाकात
भागवत के बिलासपुर प्रवास के दौरान भाजपा के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह की मुलाकात भी चर्चा का केंद्र रही। बताया गया कि उन्होंने संघ प्रमुख से बंद कमरे में बातचीत की। हालांकि, इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रदेश में सरकार और भाजपा संगठन से जुड़े कई विषयों पर चर्चाओं के बीच हुई इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में संगठनात्मक समन्वय और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, बातचीत का वास्तविक एजेंडा स्पष्ट नहीं होने के कारण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों ने बढ़ाई चर्चा
संघ प्रमुख के दौरे के दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी उनसे मिलने पहुंचे। इनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, विधायक सुशांत शुक्ला और रजनीश सिंह सहित अन्य नेता शामिल बताए गए।
प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर जारी चर्चाओं के बीच इन मुलाकातों को अहम माना जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों तथा भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन नेताओं ने भागवत से किन विषयों पर चर्चा की, इसका कोई विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए इन मुलाकातों को सीधे मंत्रिमंडल विस्तार या किसी संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़ना फिलहाल अटकलों तक ही सीमित है।
मंत्रियों की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय
दौरे के दौरान कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के साथ ही सत्ता से जुड़े कई प्रमुख नेताओं और मंत्रियों की अनुपस्थिति पर भी चर्चा हुई। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि, संघ की संगठनात्मक बैठकों में राजनीतिक पदाधिकारियों की भागीदारी को लेकर उसकी अपनी कार्यशैली और परंपराएं रही हैं। ऐसे में किसी नेता की मौजूदगी या गैरमौजूदगी के आधार पर राजनीतिक संकेत निकालना सही नहीं होगा।
संगठन और सत्ता के बीच समन्वय पर टिकी निगाहें
मोहन भागवत का बिलासपुर दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। एक ओर RSS अपने संगठनात्मक विस्तार की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, तो दूसरी ओर भाजपा नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
अब सबकी निगाहें संघ की आगामी राष्ट्रीय बैठक और प्रदेश भाजपा के अगले कदमों पर रहेंगी। छत्तीसगढ़ में RSS के प्रांत पुनर्गठन को लेकर अंतिम निर्णय क्या होता है और प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं को आगे क्या दिशा मिलती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, भागवत के दौरे से जुड़े संगठनात्मक फैसलों और राजनीतिक अटकलों के बीच आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।