Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Oct, 2026 01:49 PM

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताने से मध्यप्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
भोपाल। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताने से मध्यप्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंत्रिपरिषद से इस्तीफा सौंपने के साथ उन्होंने राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की अनुमति भी मांगी है। मुरुगन के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने और आगामी लोकसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। एल. मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। केंद्र सरकार में वे सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके इस्तीफे और राज्यसभा छोड़ने की इच्छा ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। हालांकि, राज्यसभा की सदस्यता से उनके इस्तीफे की प्रक्रिया और सीट खाली होने की स्थिति में उपचुनाव को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
तमिलनाडु में संगठन मजबूत करने पर जोर
मुरुगन की राजनीतिक मंशा को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, वे अब तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं। उनका फोकस पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय भूमिका निभाने पर है। वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मुरुगन की संभावित वापसी को पार्टी की संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

मजदूर परिवार से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में अपने जीवन के संघर्षों का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि वे किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक नहीं रखते। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे और मवेशी चराकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनका परिवार तमिलनाडु के कोनूर गांव में साधारण जीवन जीता रहा है।
मुरुगन ने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनका बेटा देश की केंद्र सरकार में मंत्री बनेगा। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा को दिया। उनके मुताबिक, पार्टी में सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले कार्यकर्ताओं को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं।
मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट पर क्या होगा?
एल. मुरुगन की राज्यसभा सीट खाली होने की स्थिति में मध्यप्रदेश में उपचुनाव की संभावना बन सकती है। हालांकि, इसके लिए सदस्यता से इस्तीफा और उसके स्वीकार होने की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसके बाद निर्वाचन आयोग नियमानुसार आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मुरुगन के संभावित इस्तीफे से इन सीटों को लेकर राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा शुरू हो सकती है। भाजपा के लिए यह सीट महत्वपूर्ण है, जबकि संभावित उपचुनाव में पार्टी की ओर से किस चेहरे को मौका दिया जाएगा, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
फिलहाल, मुरुगन के इस कदम का सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि वे केंद्रीय जिम्मेदारी से हटकर तमिलनाडु में पार्टी के लिए सीधे तौर पर काम करना चाहते हैं। अब आगे की तस्वीर उनके राज्यसभा इस्तीफे की औपचारिक प्रक्रिया और भाजपा के संगठनात्मक फैसलों से साफ होगी।