Edited By Himansh sharma, Updated: 18 Sep, 2026 07:26 PM
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को भले ही अभी करीब दो साल का वक्त बाकी हो, लेकिन सियासी हलचल ने अभी से जोर पकड़ लिया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को भले ही अभी करीब दो साल का वक्त बाकी हो, लेकिन सियासी हलचल ने अभी से जोर पकड़ लिया है। पिछले करीब दो महीनों में बीजेपी को संगठनात्मक स्तर पर एक के बाद एक झटकों का सामना करना पड़ा है। अलग-अलग जिलों में नेताओं और पदाधिकारियों के इस्तीफों ने पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 27 जुलाई से 17 सितंबर के बीच डोंगरगढ़, खैरागढ़ और रायगढ़ से जुड़े घटनाक्रमों को देखें तो 156 नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के पार्टी से अलग होने की बात सामने आई है। इनमें सामूहिक इस्तीफे भी शामिल हैं। इसी बीच 11 सितंबर को कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब के कांग्रेस में शामिल होने से इस पूरे घटनाक्रम को एक अलग राजनीतिक आयाम मिल गया।
डोंगरगढ़ में पहली बड़ी तस्वीर, 111 कार्यकर्ताओं ने छोड़ा संगठन
बीजेपी के भीतर असंतोष की बड़ी तस्वीर 27 जुलाई को डोंगरगढ़ में सामने आई। शहर भाजपा मंडल से जुड़े 111 सदस्यों ने एक साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं की नाराजगी मुख्य रूप से संगठन की कार्यशैली को लेकर बताई गई। सोशल मीडिया पर सामने आए उनके बयानों में मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को संगठन में अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।कुछ कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक फैसलों में गुटबाजी और चुनिंदा लोगों के प्रभाव का आरोप भी लगाया। सामूहिक इस्तीफे के बाद डोंगरगढ़ बीजेपी में अंदरूनी असंतोष को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
चार दिन बाद फिर झटका, 26 पदाधिकारियों ने भी दिया इस्तीफा
111 कार्यकर्ताओं के इस्तीफे के बाद विवाद थमा नहीं। 31 जुलाई को डोंगरगढ़ में ही बीजेपी के 26 पदाधिकारियों और नेताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला किया। इन नेताओं ने भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को इस्तीफा सौंपा। इस्तीफा पत्र में संगठन के भीतर कथित परिवारवाद और गुटबाजी का मुद्दा उठाया गया। नेताओं का कहना था कि पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से असंतोष बढ़ रहा है। इस्तीफा देने वालों में पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष एम. तुलसी और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला मंत्री बलविंदर सिंह भाटिया समेत अन्य पदाधिकारी शामिल बताए गए। इस तरह महज चार दिनों के भीतर डोंगरगढ़ में बीजेपी से जुड़े 137 लोगों के इस्तीफे ने संगठन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
मंत्री के बड़े भाई के कांग्रेस में जाने से बढ़ी चर्चा
इसके बाद 11 सितंबर को छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। पोरा तिहार के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरु ढालदास साहेब को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। सतनामी समाज में पहचान रखने वाले गुरु ढालदास साहेब के कांग्रेस में शामिल होने को राजनीतिक रूप से अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान भूपेश बघेल ने उनके कांग्रेस में आने का स्वागत किया और कहा कि इससे पार्टी को मजबूती मिलेगी। वहीं, इस घटनाक्रम ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को बढ़ा दिया।
डोंगरगढ़ के बाद खैरागढ़ में भी सामने आई नाराजगी
बीजेपी के सामने अगली चुनौती खैरागढ़ से आई। 17 सितंबर को पाड़ादाह भाजपा मंडल से जुड़े छह बूथ अध्यक्षों समेत कुल 11 पदाधिकारियों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पदाधिकारियों ने रायपुर पहुंचकर प्रदेश महामंत्री नवीन मारकंडे को अपना इस्तीफा सौंपा। बताया गया कि संगठन की ओर से उन्हें समझाने की कोशिश भी की गई, लेकिन उन्होंने अपना फैसला वापस नहीं लिया। इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों की ओर से मंडल अध्यक्ष की कथित कार्यशैली और कार्यकर्ताओं के साथ पक्षपात को लेकर नाराजगी जताई गई।
हालांकि मंडल अध्यक्ष गोरेलाल वर्मा ने कहा कि उन्हें इस्तीफे या किसी बड़ी नाराजगी की जानकारी नहीं है। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. बिशेसर साहू ने भी कहा कि उन्हें अभी तक इस संबंध में औपचारिक जानकारी नहीं मिली है और यदि कोई मामला सामने आता है तो संगठन स्तर पर चर्चा की जाएगी।
रायगढ़ में आठ पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे की पेशकश
इसी दिन रायगढ़ जिले के पुसौर नगर पंचायत में भी बीजेपी से जुड़ा मामला सामने आया। यहां आठ निर्वाचित पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की पेशकश की। पार्षदों ने जिला भाजपा अध्यक्ष अरुणधर दीवान के नाम आवेदन देकर इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया। इनमें वार्ड क्रमांक 6 के बलराम संवरा, वार्ड 14 के शौकीराम चौहान, वार्ड 11 के रूपेश कुमार साव, वार्ड 3 की मंजू पटेल, वार्ड 2 के फागुलाल प्रधान, वार्ड 1 के प्रदीप यादव, वरुण महाणा और नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेश साव के नाम सामने आए हैं।
पार्षदों ने अपने क्षेत्र में पानी, बिजली, सड़क और नाली जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान में अपेक्षित गति नहीं होने की बात कही। उनका कहना है कि पार्षद निधि से प्रस्तावित और स्वीकृत कार्य भी पर्याप्त तेजी से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। ऐसे में जनता के बीच जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
अब सवाल संगठन के भीतर की नाराजगी पर
लगातार सामने आए इन घटनाक्रमों ने छत्तीसगढ़ बीजेपी के संगठनात्मक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों की नाराजगी सामने आना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण विषय माना जाता है। इन घटनाओं में इस्तीफा देने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्थानीय कारण बताए हैं। कहीं संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठे, कहीं गुटबाजी और कथित उपेक्षा का मुद्दा सामने आया, तो कहीं स्थानीय विकास कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर की।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बीजेपी संगठन इन शिकायतों और इस्तीफों के बाद स्थानीय स्तर पर किस तरह की पहल करता है। दूसरी ओर कांग्रेस इन घटनाक्रमों को अपने पक्ष में राजनीतिक मुद्दे के रूप में किस तरह पेश करती है, यह भी आने वाले समय में देखने वाला विषय होगा।