मंत्री दर्जा नहीं मिलने से BJP नेताओं में बेचैनी! MP के 48 नेताओं को अब सरकार के आदेश का इंतजार

Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Sep, 2026 12:38 PM

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मध्यप्रदेश की सियासत में निगम-मंडल और विभिन्न बोर्डों में नियुक्त किए गए भाजपा नेताओं को लेकर अब नई चर्चा शुरू हो गई है।

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में निगम-मंडल और विभिन्न बोर्डों में नियुक्त किए गए भाजपा नेताओं को लेकर अब नई चर्चा शुरू हो गई है। लंबे इंतजार के बाद सत्ता से जुड़े संस्थानों में जिम्मेदारी मिलने के बावजूद करीब 48 नेता अभी उस राजनीतिक हैसियत का इंतजार कर रहे हैं, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। वजह है अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनने के बाद भी मंत्री पद का दर्जा नहीं मिलना। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में सरकार और संगठन के स्तर पर सहमति के बाद अलग-अलग निगम, मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड और आयोगों में भाजपा नेताओं को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इनमें 34 नेताओं को अध्यक्ष और 14 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया गया। नियुक्तियों के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही इन्हें कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।

पद मिला, लेकिन अपेक्षित प्रोटोकॉल नहीं

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ नेताओं के लिए यह स्थिति उत्साह बढ़ाने के बजाय निराशा का कारण बन रही है। लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहने के बाद जब जिम्मेदारी मिली तो नेताओं को उम्मीद थी कि मंत्री दर्जा मिलने से उनका प्रशासनिक प्रभाव भी बढ़ेगा। लेकिन फिलहाल पद तो है, मगर मंत्री दर्जे से जुड़ी सुविधाएं और प्रोटोकॉल नहीं मिलने से कई नेता असहज बताए जा रहे हैं।

मंत्री दर्जा मिलने के बाद अधिकारियों के स्तर पर संबंधित अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की बात को ज्यादा प्राथमिकता मिलने की उम्मीद रहती है। सरकारी कामकाज से जुड़े मामलों में पत्राचार, अधिकारियों से मुलाकात और कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान में भी इसका असर माना जाता है। यही वजह है कि दर्जे को लेकर भाजपा नेताओं के बीच इंतजार बढ़ता जा रहा है।

कुछ महीनों में खत्म होने वाला है पवैया का कार्यकाल

इन नियुक्तियों में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया का नाम भी शामिल है। खास बात यह है कि उनका कार्यकाल अब ज्यादा लंबा नहीं बचा है। ऐसे में मंत्री दर्जे को लेकर फैसला कब होगा, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

किन नेताओं को मिली अध्यक्ष की जिम्मेदारी?

सरकार की ओर से जिन प्रमुख नेताओं को अलग-अलग निगम, मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण और आयोगों में अध्यक्ष बनाया गया है, उनमें जयभान सिंह पवैया, रामकृष्ण कुसमारिया, रामलाल रौतेल, डॉ. कैलाश जाटव, डॉ. निवेदिता शर्मा, रेखा यादव, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, प्रवीण शर्मा, केशव सिंह बघेल, रामनिवास रावत, सत्येंद्र भूषण सिंह, संजय नगायच, केपी यादव, केशव सिंह भदौरिया, प्रभुदयाल कुशवाह, पंकज जोशी, अशोक जादौन, वीरेंद्र गोयल, संदीप जैन, महेंद्र सिंह यादव, मधुसूदन भदौरिया, रवि सोलंकी, राजेंद्र भारती, विनोद गोटिया, अशोक शर्मा, मनोहर पोरवाल, विजय यादव, रमेशचंद्र शर्मा, कौशल शर्मा और गुड्डी आदिवासी सहित अन्य नाम शामिल हैं।

14 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया गया

इसी तरह सरकार ने मनोहर लाल नागर, संजीव कांकर, राकेश जादौन, उदयवीर सिंह गुर्जर, प्रशांत केशरवानी, सुधीर गुप्ता, वेद प्रकाश शिवहरे, मुकेश यादव, रवि वर्मा, हरिश मेवाफरोश, डॉ. अजय सिंह, संजय तीर्थानी, गोविंद काकाणी और प्रवीण सोनी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार इन 48 नेताओं को मंत्री दर्जा कब देती है? लंबे इंतजार के बाद जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं के लिए अब अगला आदेश ही उनकी राजनीतिक ताकत और प्रभाव की तस्वीर साफ करेगा।

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