Edited By Vandana Khosla, Updated: 18 May, 2026 03:38 PM

रायपुरः राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज सुबह 8 बजे राजधानी रायपुर में बेहद चिंताजनक घटना घटी, यह घटना डरावनी है, झकझोर कर रख देने वाली है। प्रदेश के वरिष्ठ...
रायपुरः राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज सुबह 8 बजे राजधानी रायपुर में बेहद चिंताजनक घटना घटी, यह घटना डरावनी है, झकझोर कर रख देने वाली है। प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता विधायक धरमलाल कौशिक के साथ सरेआम लूट की घटना हो गई, जब वे अपने निवास के पास मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, लुटेरे उनका मोबाईल छीनकर भाग गए। यह घटना जब हुई है उस समय देश के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अमित शाह राजधानी में थे और राजधानी हाई अलर्ट पर है ऐसे समय पर घटना छत्तीसगढ़ पुलिस के गाल पर, रायपुर पुलिस कमिश्नरी के गाल पर और प्रदेश के गृहमंत्री के गाल पर करारा तमाचा है।
धरमलाल कौशिक छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके है, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके है, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके है, राज्य के मंत्री रह चुके है, उनके साथ लूट होना सामान्य घटना नहीं है। राजधानी की बिगड़ चुकी कानून व्यवस्था को सुधारने के नाम पर सरकार ने राजधानी में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू किया था, राजधानी की कानून व्यवस्था में कोई सुधार तो नहीं हुआ। कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के कारण नागरिकों की परेशानी जरूर बढ़ गई। अपराध और अपराधी तो बेलगाम है ही अब सड़क पर पुलिस का चालान नागरिकों में एक नया खौफ पैदा कर रहा है। रायपुर पुलिस कमिश्नरी में चार आईपीएस तैनात है, एक आईजी स्तर के अधिकारी, एक आईपीएस एसपी स्तर के अधिकारी, तीन आईपीएस एडिशनल एसपी की तैनाती की गयी, उप पुलिस अधीक्षक तो पहले से थे लेकिन थानों का अमला वही है।
थानों में मैदानी अमला जो है उसे अपराध नियंत्रण के बजाय केवल ट्रैफिक में वसूली की जवाबदेही दी गयी है। यदि कमिश्नरी प्रणाली लागू किया है तो थानों में भी पर्याप्त स्टाफ दिया जाए। साथ ही रायपुर कमिश्नरी के जिम्मेदार अधिकारियों को यह अहसास कराया जाना चाहिए कि उनका काम केवल जनता को परेशान करना नहीं, अपराधों पर अंकुश लगाना भी है। रायपुर में लूट, हत्या, चाकूबाजी, बलात्कार की घटना आम हो गई। प्रतिदिन राजधानी में दो से तीन हत्याएं हो रही, खरोरा रोड में 1 करोड़ की लूट हो गई, अपराधी आज भी गिरफ्त से बाहर है।
गांजा, सूखा नशा, अवैध शराब गली कूचे में बिक रही, कमिश्नरेट बनाने के कोई फायदा दिखा नहीं केवल पुलिस ने शो-ऑफ शुरू किया है, अपराध और अपराधाी दोनों बेलगाम है। स्थितियां इतनी भयावह हो गयी है कि अब घटनाओं के बाद एफआईआर तक नहीं लिखा जाता, सादा आवेदन लेकर फरियादी को वापस भेज दिया जाता है। यदि आप अपराध के बाद एफआईआर नहीं लिखेंगे तो रिकार्ड में आंकड़े भले कम हो जाए लेकिन अपराधी तो बेखौफ होकर और घटना को अंजाम देंगे। दर्जनों ऐसे उदाहरण है जहां पर पुलिस ने घटना के बाद एफआईआर नहीं लिखा। चाकूबाजी की छात्र को धारदार नुकीले वस्तु से हमला बताकर कमतर बताने की कोशिश की जाती है। बिगड़ चुकी कानून व्यवस्था की जवाबदेही मुख्यमंत्री तय करे और अपने नाकाबिल गृह मंत्री को बर्खास्त करे।