"घड़ियाली आंसू" बहाकर महिलाओं के प्रति सम्मान दर्शाने की नौटंकी कर रहे CM शिवराज- शोभा ओझा

Edited By meena, Updated: 20 Oct, 2020 07:39 PM

cm shivraj is doing a gimmick to show respect to women shobha ojha

मध्य प्रदेश में महिलाओं पर अभद्र टिप्पणीयों को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। ऐसे में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने शिवराज सरकार पर कुछ सवाल खड़े किए हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम शिवराज...

भोपाल(इजहार हसन खान): मध्य प्रदेश में महिलाओं पर अभद्र टिप्पणीयों को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। ऐसे में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने शिवराज सरकार पर कुछ सवाल खड़े किए हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम शिवराज महिलाओं के प्रति सम्मान दर्शाने की नौटंकी कर रहे हैं। उनके "घड़ियाली आंसू" पूरी तरह से दिखावटी है। यदि सच में बीजेपी महिलाओं का सम्मान करती है तो क्या सीएम शिवराज सिंह चौहान बिसाहूलाल सिंह द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी की पत्नी को रखैल कहने वाले बयान पर भी कार्रवाई करेंगे। क्या उन्हें इस अभद्र बयान के लिए पार्टी से बाहर करेंगे?

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शोभा ओझा ने कहा कि चुनावी माहौल में राज्य के दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान के चरम पर हैं। दोनों ही दल अपने अभियान में किसी प्रकार की कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहते हैं। ऐसे माहौल में सर्वाधिक असर प्रदेश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर पड़ा है, जिस ओर सरकार का ध्यान बिल्कुल नहीं है। विपक्ष द्वारा दिए गए बयानों को अपने लिए मौका समझ कर, सरकार जिस तरह बचकाना हरकतें कर रही है, वह पूरी तरह समझ से परे है, ऐसा करते वक्त सरकार यह भूल जा रही है कि राज्य की सत्ता उसकी है और यहां कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उसी की है। यह बड़ा दुखद है कि सरकार उपरोक्त दोनों ही मुद्दों पर शर्मनाक रूप से असफल सिद्ध हुई है।
ओझा ने आगे कहा कि पिछले डेढ़ दशक से प्रदेश की सत्ता पर काबिज शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 47000 बलात्कारों के मामलों और एनसीआरबी की रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश का महिला अत्याचारों में लगातार नंबर 1 बने रहने के लिए जिम्मेदार शिवराज सिंह को व्यर्थ के प्रपंचों और दिखावों को छोड़कर महिला सुरक्षा को लेकर अब वास्तविक रूप से गंभीर रवैया अपना लेना चाहिए।

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वहीं उन्होंने सवाल उठाए कि पूर्व सीएम कमलनाथ के बयान और उनको घेरते वक्त सरकार यह भूल गई कि उनकी पार्टी में बिसाहूलाल सिंह जैसे नेता मौजूद हैं, जो विपक्षी पार्टी के प्रत्याशी की पत्नी को ही "रखैल" जैसे निम्नस्तरीय शब्दों से संबोधित कर रहे हैं, क्या प्रदेश  सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह उनके खिलाफ भी धरना देने की कोई योजना बना रहे हैं? क्या मुख्यमंत्री उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर, उन्हें पार्टी से निकालने का साहस करेंगे? क्या बिसाहूलाल के ऐसे आचरण के लिए मुख्यमंत्री अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी कोई पत्र लिखेंगे? मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए।
ओझा ने कहा कि यह शर्मनाक है कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान के मामले में भाजपा के मापदंड दोहरे मापदंड अपना रही है। क्योंकि कांग्रेस के नेताओं की टिप्पणियों पर शिवराज सरकार तुरंत संवेदनशील हो जाती है लेकिन अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेताओं की उन टिप्पणियों पर खामोश क्यों हो जाते हैं, जिनमें यहां तक कह दिया जाता है कि "लड़कियां और महिलाएं यदि लक्ष्मण रेखा पार करेंगी तो उन्हें रावण उठा ले जाएगा।" वहीं  कुलदीप सेंगर, चिन्मयानंद, लक्ष्मीकांत शर्मा, संजय जोशी और राघव के बयानों को भी पार्टी द्वारा अनदेखा किया गया। यहा तक कि हाथरस जैसे इतने बड़े हालिया वीभत्स कांड के बाद भी भाजपा नेताओं के साथ मध्यप्रदेश सरकार भी बेशर्म चुप्पी ओढ़े रखी। वहीं जब विजय शाह ने मुख्यमंत्री की पत्नी के लिए ही झाबुआ में अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणी की थी, तब मुख्यमंत्री ने, न तो श्री विजय शाह के खिलाफ कोई धरना दिया था और न ही उन्हें पार्टी से निकाला था। 

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