Edited By Desh Raj, Updated: 26 Mar, 2026 03:03 PM

जिला न्यायालय ग्वालियर में एक ऐसा मामला आया जो चर्चा का विषय बन गया। जज साहब ने थाना प्रभारी की ऐसी क्लास लगाई कि मामला ने सुर्खियां बटोर लीं। थाना प्रभारी के पास कोई जवाब ही नहीं था।
(ग्वालियर):जिला न्यायालय ग्वालियर में एक ऐसा मामला आया जो चर्चा का विषय बन गया। जज साहब ने थाना प्रभारी की ऐसी क्लास लगाई कि मामला ने सुर्खियां बटोर लीं। थाना प्रभारी के पास कोई जवाब ही नहीं था। दरअसल पिछले कल यानी कि बुधवार को एक मामला बेहद चर्चा में आ गया, मामला आरोन के बन्हेरी गांव में अपराध के फर्जीवाड़ा से जुड़ा था।
सुनवाई के दौरान षष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश विवेक कुमार ने कड़ा रुख अपनाया। दरअसल उन्होंने ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को समन जारी कर सुबह कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे,लेकिन एसपी कोर्ट में मौजूद नहीं हुए। Sp तो नहीं पहुंचे लेकिन निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी कोर्ट में हाजिर हुए।
कोर्ट ने पूछा गंभीर सवाल
कोर्ट में एसपी तो नहीं पहुंचे लेकिन निरीक्षक और पुलिसकर्मी हाजिर हुए थे, जज ने कड़े लहजे में पूछा कि, आपने बिना पूरी जांच किए और मजिस्ट्रेट की अनुमति लिए बगैर फरियादियों पर FIR कैसे दर्ज कर दी? ED और CBI भी बिना जांच और अनुमति के FIR दर्ज नहीं कर सकतीं तो आपमें इतनी ताकत कहां से आई। जज के इस सवाल से सन्न हो गए।
जज ने पूछा कि क्या इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से कोई लिखित अनुमति ली गई थी? पुलिसकर्मी इस पर कोई साफ जवाब नहीं दे सके। जज ने SP की अनुपस्थिति का कारण पूछा तो जवाब आया कि वो किसी काम से बाहर हैं।
कोर्ट के तीन सवालों का जबाव देने में असमर्थ रहे पुलिसकर्मा
सुनवाई के दौरान FIR को लेकर कोर्ट ने पुलिसकर्मियों से कुछ अहम पूछे। जज ने पूछा कि
पहला सवाल..
क्या मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी फरियादी को जेल भेजा जा सकता है?
दूसरा सवाल..
यदि मामला झूठा पाया गया, तो उसके खिलाफ क्या अलग से कोई कार्रवाई की गई?
तीसरा सवाल...
FIR दर्ज करने से पहले क्या SP से लिखित में अनुमति ली थी क्या?
कोर्टे न साफ किया है कि ग्वालियर में इस तरह दर्ज सभी मामलों की फाइलें खोली जाएंगी और उनकी जांच की जाएगी। लिहाजा SP को फिर से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।